February 12, 2026

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प्रधाानमंत्री आवास योजना में भारी गोलमाल

रूपेश कुमार सिंह

दिनेशपुर।‘बस एक ही उल्लू काफी है बर्बाद-ए-गुलिस्ता करने को,  हर शाख पर उल्लू बैठा है अंजाम -ए-गुलिस्ता क्या होगा।’ नगर पंचायत दिनेशपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटित आवास में हुई जबर्दस्त धांधली पर उपरोक्त पंक्तियां बिल्कुल सटीक बैठती हैं। तत्कालीन सभासद, चेयरमैन और नगर पंचायत के अधिकारियों की मिली भगत ने नियमों को ताक पर रखकर सरकारी योजना का जमकर मखौल उड़ाया है। गरीबों को मकान देने के बजाये सरकारी सेवा में कार्यरत लोगों के परिजनों को सुविधा दी गयी है। स्थलीय निरीक्षण से लेकर शपथ पत्र तक में खानापूार्ति की गयी है। बड़े पैमाने पर हुई अनियमितता के चलते शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने जिलाधिकारी को जांच के आदेश दिये हैं। बताते चलें कि मलिन बस्तियों में गरीबों और पिछड़ों को आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना संचालित है। शहरी विकास मंत्रयल द्वारा जारी इस योजना में लाभार्थियों को मकान बनाने के लिए दो लाख के अनुदान की व्यवस्था है। इस योजना के तहत 2016 में पहली किस्त में दिनेशपुर नगर पंचायत के सात वार्डों में 510 माकान आवंटित हुए। सरकारी मानक के अनुसार यह मकान उन गरीबों को मिलने थे, जिनके घर आज भी कच्चे हैं, गरीबी रेखा से नीचे हैं, घर पर कोई कमाने वाला नहीं है, देश के किसी भी भाग में लाभार्थी और उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम मकान नहीं है, परिवार की वार्षिक आय तीन लाख से अधिक न हो, इसके अलावा भी तमाम प्रावधान हैं। लेकिन सरकारी नियमों को धता बताते हुए सभासद और चेयरमैन के चहेतों को मकान दिया गया है। आनन -फानन में निर्माण शुरू किये गये, लेकिन दो साल में आज तक एक भी लाभार्थी को पूर्ण भुगतान नहीं किया गया है। न ही एक भी मकान पूर्ण हो पाया है। इस बीच 2017 में

दूसरी किस्त जारी की गयी। इसमें 535 लोगों को लाभ देने की बात कही गयी। लेकिन योजना जमीन पर फल-फूल नहीं पायी। नगर पंचायत के वार्ड नम्बर एक, दो, तीन, चार और पांच में सबसे ज्यादा अनियमितता बरती गयी है। जारी लिस्ट में पुराने वाशिंदों की जगह सभासदों द्वारा अपने करीबियों को आवास दिया गया। कई मामले ऐसे हैं जिसमें एक ही प्लाट पर एक ही परिवार के तीन-तीन लोगों को मकान का लाभ दिया गया। कई मामले ऐसे हैं जिनके पास पहले से पक्का मकान है, लेकिन उनकों गरीबों का हक काट कर लाभ दिया गया। सरकारी नौकरी में कार्यरत व्यक्ति के परिजनों को भी इस योजना से उपकृत किया गया है। साधन संपन्न और अर्थिक तौर पर मजबूत लोगों को भी मकान दिया गया। सवाल उठता है कि यह सब धांधली किसके इशारे पर हुई? क्यों नहीं अधिकारियों ने  सही से मानकों का परीक्षण किया? इतना ही नहीं नोटराईज शपथ पत्र की जगह दस रूपये का शपथ पत्र क्यों लिया गया? बताया जा रहा है कि दोनों लिस्टों में 60 फीसदी अपात्र लोगों को पात्र बनाया गया है। सूचना अधिकार से प्राप्त जानकारी से पता चलता है कि इसके अलावा भी कई घोर अनियमितता बरती गयी हैं। सर्वे रिपोर्ट पर किसी के हस्ताक्षर नहीं हैं। इससे पता चलता है कि सर्वे गुपचुप तरीके से किया गया। अनुबंध पत्र पर चेयरमैन और अधिशासी अधिकारी के हस्ताक्षर न होना भी संदेह पैदा करता है। वार्ड सभासद का गवाह के तौर पर सभी लाभार्थियों के आवेदन पर हस्ताक्षर करना भी कानूनन ठीक नहीं है। इसके अलावा लाभार्थियों से 20-20 हजार रूपये रिश्वत लेने के मामले भी सामने आये हैं। इस मामले पर वार्ड नम्बर पांच निवासी चंपक विश्वास की शिकायत पर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने 21 अगस्त को जिला अधिकारी ऊधम सिंह नगर को निर्देशित किया है। पूरे प्रकरण की जांच करने का आदेश दिया गया है। बताते चले कि आवास योजना में बड़े स्तर पर धांधली का आरोप तमाम जगह से लग रहा है। महुवा डाबरा, जसपुर नगर पंचायत में इस मामले में मुकदमा तक दर्ज हो चुका है। नगर पंचायत दिनेशपुर में भी इस मामले में जमकर भ्रष्टाचार और अनियमितता हुई है, ऐसी शिकायत लगातार आ रही है। बाकी जांच के बाद सारी तह खुलने की उम्मीद है।

दो साल में लाभार्थियों को नहीं मिला पूर्ण भुगतान

दिनेशपुर,3सितम्बर। आवास योजना के तहत पहली लिस्ट के 510 लाभार्थी दो साल बाद भी भुगतान के लिए दर-दर भटक रहे हैं। एक भी व्यक्ति को पूर्ण भुगतान नहीं किया गया है। न ही एक भी मकान पूरा हुआ है। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी, लिपिक, सभासद और चेरयमैन की कारगुजारी के चलते लोग बरसात में भी खुले आसमान में रहने को मजबूर हैं। लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। दो साल

में 510 मकानों में से एक भी मकान पूर्ण नहीं हो सका है। यह घोर लापवाही ही है। पैसा न मिलने की स्थिति में 90 फीसदी मकानों पर आज तक लेंटर नहीं पड़ सका है। बताते चलें कि लाभार्थियों को बीस हजार, एक लाख, साठ हजार और फिर बीस हजार की चार किस्तों में दो लाख का भुगतान होना था। नगर पंचायत द्वारा दो साल में एक भी लाभार्थी को पूर्ण भुगतान नहीं किया गया है। जिस कारण एक भी मकान पूरा नहीं हो सका है। इस मामले में जोरदार सियासत हो रही है। कई बार शिक्षा मंत्री का घेराव भी हो चुका है, लेकिन भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।

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