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आखिर वह वीआईपी कौन ? कड़ाके की ठंड के बावजूद गांधी पार्क में 24 घंटे से चल रहा हरीश रावत का धरना समाप्त

देहरादून(उद संवाददाता)। कड़ाके की ठंड के बावजूद पूर्व सीएम हरीश रावत पिछले 24 घंटे से धरने पर डटे रहे। वहीं आज अंकिता भंडारी हत्याकांड की उच्चस्तरीय जांच के साथ ही वनंतरा रिसार्ट में आने वाले तकाथित वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं होने से आहत पूर्व सीएम हरीश रावत का राजधानी देहरादून के गांधी पार्क में 24 घंटे से चल रहा धरना समाप्त हो गया है। वही आधी रात तक पूर्व सीएम हरीश रावत कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ धरना स्थल पर डटे रहे। इस दौरान धरना स्थल पर अलाव जलाकर बैठे रहे। धरना स्थल पर पहुंची महिलाओं ने अंकिता बेटी की याद में संगीत संध्या कर भजन गाये। इस दौरान पूर्व सीएम ने धरना स्थल पर भोजन किया और मीडिया कर्मियों से भीे मुखातिब हुए। वहीं आज दापेहर दो बजे धरनाथल पर कार्यकर्ताओ को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि भाजपा सरकार अंकिता हत्याकांड पर संवेदनहीन साबित हो रही है।  सभी प्रदेशवासियों के मन में एक ही सवाल है कि आखिर वह वीआईपी कौन है। लेकिन सरकार ने अंकिता को न्याय दिलाने के लिये मौन साधे हुए है। सरकार ने एक प्रतिनिध भी नहीं भेजा जो यह पाये कि हम न्याय के लिये साथ है  औिर हम उस वीआईपी को खोजकर लायेगे जबकि मेरे धरने के खिलाफ मंत्रियों की फौज को उतार दिया। जब तक सरकार की जांच ऐजेंसी वीआईपी को सामने नहीं लायेगे हम निरंतर आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की अनामिका व अन्य बेटियों को भी हवस का शिकार होना पड़ा है। आज बेटियां अपने ही राज्य में सुरक्षित नहीं हैं।
हमारा धरना सरकार के खिलाफ नहीं,एसआइटी की जांच से जनता संतुष्ट नहीं
देहरादून। गांधी पार्क में अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिये धरने पर बैठे पूर्व सीएम हरीश रावत ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया पर अपने 24 घंटे के धरने की कुछ तस्वीरे साझा करते हुए बताया कि अंकिता के बलिदान से उत्तराखंड का भावनात्मक जुड़ाव इस तथ्य से स्पष्ट हो जाता है कि केवल फेसबुक पर धरने का उल्लेख करने से मात्र हजारों भाई-बहन गांधी पार्क में अपनी एक जुटता जारी करने आए हैं, कुछ लोग एक-एक, दो-दो मिनट के लिए आए मगर चंद शब्दों में अपनी भावना का गागर उड़ेल गए। रात देर तक बहनों को हटाने में मुझे बड़ी कोशिश करनी पड़ी 60-70 साल के महिला-पुरुष जो रुग्ण भी है वो भी धरना स्थल पर आए। रात कई लोग धरना स्थल पर भी मेरे साथ सोए, बेटा अंकिता ये उत्तराखंड के लोगों का तुम्हारे बलिदान के साथ समर्पण है। मुझे विश्वास है कि आगे भी उत्तराखंडी संघर्ष का यह क्रम थमेगा नहीं। हमारी अस्मिता से खिलवाड़ करने की सोच, इस संघर्ष के साथ दफन होगी, हमारा यह धरना सरकार के खिलाफ नहीं, हां भाजपा ने जरूर इसे अपने खिलाफ मान लिया है। खैर जाकी रही भावना जैसी। वनंतरा प्रकरण की सीबीआइ जांच व वीआइपी के नाम के पर्दाफाश की मांग को लेकर सोमवार को गांधी पार्क में चल रहे धरना-प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री के दो दिवसीय धरने के पहले दिन गांधी पार्क में धरने में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता व कार्यकर्त्ता शामिल हुए। उन्होंने कहा वनंतरा प्रकरण को तीन महीने बीत गए हैं, लेकिन पुलिस वीआइपी के नाम का पर्दाफाश नहीं कर पाई है। जनता राज्य सरकार की ओर से गठित एसआइटी की जांच से संतुष्ट नहीं है। प्रकरण में बहुत से सवाल अनसुलझे हुए हैं। जैसे रिसार्ट में बुलडोजर किसके आदेश से चलाया गया? क्यों चलाया गया? रिसार्ट को सील क्यों नहीं किया गया? रिसार्ट में पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में दो बार आग कैसे लग गई? क्या इस लापरवाही के लिए किसी की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की गई? कहा कि भाजपा सरकार में राज्य की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भाजपा सरकार में महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि वनंतरा प्रकरण के दोषियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में होनी चाहिए, ताकि वीआइपी का नाम उजागर हो सके और सत्य सबके सामने आ सके। धरने में पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, पूर्व मंत्री गोविंद सिंह कुंजवाल, हीरा सिंह बिष्ट, मंत्री प्रसाद नैथानी, संगठन महामंत्री विजय सारस्वत, राजपाल खरोला, सतपाल ब्रह्मचारी, सीपीआइ नेता समर भंडारी, एसएस पांगती, प्रकाश थपलियाल, पूर्व विधायक ओम गोपाल, सुरेंद्र अग्रवाल, महानगर अध्यक्ष डा. जसविंदर सिंह गोगी, पूरन सिंह रावत, वीरेंद्र पोखरियाल, गरिमा दसौनी, दर्शन लाल आदि मौजूद रहे।
यह कांग्रेस में गुटीय संघर्ष की लड़ाई का परिणाम: भाजपा
देहरादून। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्टð ने हरदा के धरने को राजनीतिक नौटंकी करार देते हुए कहा कि यह कांग्रेस में गुटीय संघर्ष और अस्तित्व की लड़ाई का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वनंतरा रिसार्ट प्रकरण में राज्य की बेटी को न्याय मिले, इसके लिए भाजपा प्रतिब( है, लेकिन कांग्रेस इस दुख की घड़ी का राजनीतिक लाभ लेने की फिराक में है। उन्होंने कहा कि प्रकरण की जांच कर रही एसआइटी पांच सौ पेज की चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। सरकार और जनभावना के अनुरूप जांच एजेंसी निष्पक्ष और बिना दबाव के कार्य कर रही है। प्रदेश सरकार के मंत्रियों और भाजपा संगठन ने वनंतरा रिसार्ट प्रकरण को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के धरना-प्रदर्शन पर उन्हें निशाने पर लिया है। उन्होंने इसे हरदा की राजनीतिक नौटंकी करार देते हुए कहा कि वे कांग्रेसी अंर्तद्वंद के बीच अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। साथ ही रावत को इस मामले में अदालत के निर्णय का सम्मान करते हुए राजनीति न करने की नसीहत दी है। वहीं कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, सुबोध उनियाल सहित अन्य नेताओं ने पूर्व सीएम हरीश रावत के धरने को राजनीतिक स्टंट करार दिया है।

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