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‘ उत्तराखंड’ में अब लगेगा महंगी बिजली का ‘करंट’: पभोक्ताओं से फ्यूल चार्ज एडजेस्टमेंट के नाम पर करोड़ों रुपए अतिरिक्त वसूलने की तैयारी

रूद्रपुर । महंगाई कम करने के तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद महंगाई दिनों दिन बेकाबू होती जा रही है। खुदरा महंगाई दर के 7.7 का आंकड़ा छूने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि शायद सरकारी स्तर पर महंगाई कंट्रोल करने के लिए कोई फौरी  उपाय सामने आए, ताकि आमजन को किसी ममोर्चे पर तो महंगाई से कुछ राहत मिल पाती ,लेकिन जान पड़ता है जैसे आम लोगों की महंगाई कम होने की यह उम्मीद एक दुस्वप्न ही साबित होगी। वह इसलिए क्योंकि उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड  अब फ्यूल चार्ज एडजस्टमेंट के नाम पर बिजली की दरें 14 पैसे से लेकर 52 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाने जा रहा है। बिजली कि यह बढ़ी हुई दरें जुलाई माह से लागू होगी। बिजली की दरें बढ़ाने के पीछे यूपीसीएल द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि गैस एवं कोयले से बिजली उत्पन्न करने वाले पावर प्लांट की बिजली महंगी होने के कारण  बिजली की दरों में यह बढ़ोतरी करनी पड़ी है ।याद दिलाना होगा कि मौजूदा वित्त वर्ष के आरंभ में ही यूपीसीएल एवं ऊर्जा नियामक बोर्ड द्वारा फ्यूल चार्ज अधिरोपित किए जाने की बात कही गई थी। चालू वित्त वर्ष के पहले 3 महीने महीनों अर्थात अप्रैल-मई एवं जून तक फ्यूल चार्ज नहीं अधिरोपित किया गया था, मगर अब इसे जुलाई माह से प्रभावी कर दिया  गया है । हालांकि यूपीसीएल द्वारा इस फ्यूल चार्ज एडजस्टमेंट को अक्टूबर माह में रिवाइज करने की बात कहकर उपभोक्ताओं के जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास किया गया है ,लेकिन इस ताजा फ्यूल चार्ज एडजस्टमेंट से उत्तराखंड के तकरीबन 20 लाख घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को 36रुपया से 180 रुपया तक अधिक चुकाने पड़ेंगे। ताजा फ्यूल चार्ज एडजेस्टमेंट के परिणाम स्वरूप अब 100 यूनिट तक  बिजली का उपभोग करने वाले घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को 36 रुपया,200 यूनिट तक उपभोग करने वालों के लिए 72 रुपया,300 यूनिट तक का उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं को 108 रुपया,400 यूनिट तक बिजली का उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं को 144 रुपया तथा 500 यूनिट तक बिजली का उपभोग करने वाले उपभोक्ता को 180 रुपया प्रति महीना अधिक चुकाने होंगे. ताजा फ्यूल एडजस्टमेंट की खास बात  यह है कि इससे कृषि क्षेत्र को भी राहत नहीं दी गई है । अब निजी ट्यूबवेल वालों से 16 पैसा प्रति यूनिट तथा सामान्य कृषि क्षेत्र से 22 पैसा प्रति यूनिट अतिरिक्त भुगतान लिया जाएगा .इसके अतिरिक्त वाणिज्यिक उपक्रमों से 52 पैसे प्रति यूनिट तथा सरकारी संस्थानों से 49 पैसे प्रति यूनिट तक अधिक वसूली जाएंगे। बताना होगा कि उत्तराखंड में तकरीबन 27लाख विद्युत उपभोक्ता है जिसमें से 20लाख तो केवल घरेलू उपभोक्ता ही है ।अगर हम यह  मान ले कि राज्य का हर विद्युत उपभोक्ता मोटे तौर पर केवल 100 यूनिट बिजली का उपभोग हर महीने करता है, तो भी इस हिसाब से उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड कम से कम 72 लाख रुपया प्रतिमाह उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूल करेगा और यदि सारी प्राप्तियां  गणना में ली जाए तो यह रकम करोड़ों में होगी। इसे विडंबना ही कहा जाएगा की उत्तराखंड सरकार विद्युत उपभोक्ताओं से फ्यूल चार्ज एडजेस्टमेंट के नाम पर करोड़ों रुपए अतिरिक्त वसूलने की तैयारी में तो है, लेकिन उपभोक्ता सुविधाओं के नाम पर सरकार के खाते में कोई विशेष उपलब्धि नहीं है. खबर है कि उत्तराखंड के पास पर्याप्त बिजली भी नहीं है और आगामी अक्टूबर माह से बिजली की कमी अपना असर दिखाने लगेगी। अक्टूबर माह से होने वाली बिजली की संभावित कमी से निपटने के लिए  हालांकि सरकार द्वारा केंद्र सरकार से गैर आवंटित कोटा को बनाए रखने की मांग की जा रही है और हो सकता है कि केंद्र सरकार मुख्यमंत्री के अनुरोध पर उत्तराखंड को गैर आवंटित कोटे की बिजली आपूर्ति की के लिए तैयार भी हो जाए, लेकिन जिस उत्तराखंड को स्थापना के समय ही उर्जा राजधानी बनाने का संकल्प लिया गया था और समय-समय पर जिसे ऊर्जा प्रदेश बताया भी जाता है, वहां ऊर्जा क्षेत्र में ऐसी बदहाली अपने आप में बेहद शर्मनाक है. उत्तराखंड की  तुलना अगर दिल्ली से करें तो यह है शर्मिंदगी और भी बढ़ जाती है, क्योंकि दिल्ली प्रदेश में बिजली उत्पादन का कोई पावर प्लांट ना होने के बावजूद भी, दिल्ली द्वारा राज्य वासियों को 100 यूनिट तक फ्री बिजली दी जा रही है, जबकि उर्जा प्रदेश उत्तराखंड में नए-नए बहाने बनाकर बिजली के दाम आए दिन बढ़ाई जा रहे हैं अभी हाल में ही उत्तराखंड पावर कारपोरेशन द्वारा फिक्स चार्ज मे50%  तक की बढ़ोतरी की गई थी ।

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