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न पार्षद सुनते न ‘मेयर’,बदले इनके ‘तेवर’: वार्ड की सड़कों पर जमा सीवरेज का पानी बीमारियों को दे रहा आमंत्रण,आवागमन हुआ मुहाल

जनता को बहलाने को मेयर और पार्षद के हास्यास्पद तर्क, मोदी मंत्र को भी दिखाया ठेंगा
रूद्रपुर। वह दिन गए  जब जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद अपने पूरे क्षेत्र का बिना किसी भेदभाव के समान रूप से विकास किया करते थे। इन दिनों तो शहर में सियासत का वह दौर देखने को मिल रहा है जिसमें जनप्रतिनिधि क्षेत्र विशेष की जनता से किसी खास  पूर्वाग्रह के वशीभूत गिन -गिन कर बदला ले रहे हैं ।किसी क्षेत्र विशेष से वोट ना मिलने की खुन्नस के चलते वार्ड पार्षद द्वारा वार्ड की जनता से  भेदभाव किए जाने का जीता- जागता नमूना नगर निगम के वार्ड नंबर 25  स्थित टावर वाली कॉलोनी में देखने को मिल रहा है ,जहां वार्ड पार्षद घोर उपेक्षा के चलते कॉलोनी के रहवासियों का आवागमन तक मुहाल है। दिलचस्प तथ्य तो यह है किटावर कॉलोनी की वर्तमान बदहाली के उत्तरदायित्व के सवाल पर वार्ड पार्षद बड़ी होशियारी से गेंद मेयर के पाले में डाल देते हैं और मेयर उनके दर पर फरियाद लेकर पहुंची जनता को बजट ना होने और टावर वाली कॉलोनी की अवैध होने के कारण निगम द्वारा निर्माण कार्य न कराने का हास्यास्पद तर्क देकर जनता को बैरंग लौटा देते हैं । नगर निगम मेयर के तर्क गले ना उतरने वाले इसलिए भी है ,क्योंकि टावर कॉलोनी के चारों ओर की अन्य कॉलोनियों में नगर निगम द्वारा सड़क का निर्माण भी कराया गया है और विधिवत नालियां भी  बनाई गई हैं । ऐसे में यह कर यह तर्क की टावर वाली कॉलोनी सीलिंग क्षेत्र में होने के कारण अवैध है और इस कारण वहां निर्माण संभव नहीं है, इस सुलगते सवाल को जन्म देता है कि अगर टावर वाली कॉलोनी अवैध है तो उसके आसपास की अन्य कालोनियां वैध कैसे हो गई और वहां निर्माण किन मानकों के आधार पर नगर निगम द्वारा कराया गया?  इस क्रम में हम अपने पाठकों को बता दें की नगर निगम के वार्ड नंबर 25 में कुछेक सड़कें ऐसी भी हैं जो पहले ही अच्छी स्थिति में थी, मगर चहेतों को संतुष्ट करने के लिए इन सड़कों को खोद, दोबारा बना कर जनता की गाढी कमाई से प्राप्त टैक्स के पैसे का मनमाना दुरुपयोग किया गया। बताने की जरूरत नहीं की जनता के नुमाइंदों की अगर इस फंड का सदुपयोग किए जाने की मंशा जरा- सी भी होती, तो उससे वार्ड के अन्य हिस्से की कोई सड़क बनाई जा सकती थी। जाहिर है कि नगर के निजाम द्वारा ‘अंधा बांटे रेवड़ी चीन्ह चीन्ह कर देय’ वाली कहावत समूचे नगर निगम क्षेत्र में बड़ी शिद्दत से चरितार्थ की गई है । खैर ,नगर की सरकार के नुमाइंदों के रुद्रपुर शहर में खेले गए समूचे खेल को ‘उत्तरांचल दर्पण’ अपने आगामी अंकों में पाठकों के सामने लाएगा ही। फिलवत्तफ नगर निगम के वार्ड नंबर 25 की टावर वाली कॉलोनी की बदहाली की चर्चा करते हैं। इस कॉलोनी को प्रीत विहार की मुख्य सड़क से जोड़ने वाला एक इकलौता रास्ता है जिसके अधिकांश हिस्से पर में सीवरेज का पानी पूरे साल भरा रहता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस कॉलोनी में गंदे पानी के निकास की कोई व्यवस्था नहीं है ।लिहाजा गंदा पानी सड़कों पर ही जमा है और हालात यहां तक जा पहुंचे हैं कि जमा पानी में सिल्ट बन गई है और पानी बुरी तरह गंध मरने लगा है।  कॉलोनी की लगभग सभी सड़कों पर गंदा पानी जमा होने के कारण पूरी कॉलोनी में मच्छरों की भरमार है और मच्छरों की फौज अनेक संक्रामक बीमारियों को दावत दे रही है ।बात कॉलोनी की नालियों की करें, तो इनकी दशा भी सड़कों से भिन्न नहीं है नगर निगम के सफाई अमले के साल में एक दो बार ही कॉलोनी में झांकने के कारण यहां की सभी नालियां बजबजारही है इस कॉलोनी के पुर का हाल यह हाल उस समय है जब रुद्रपुर में खून सुखाने वाली गर्मी पढ़ रही है बरसात में इस कॉलोनी में क्या हाल होता होगा इसका अंदाजा पाठक बखूबी लगा सकते हैं । वैसे हम खबर के साथ बारिश के बाद कॉलोनी की सड़कों में जलजमाव का एक चित्र भी प्रकाशित कर रहे हैं ताकि नगर निगम की आंखें खुल सके। स्थानीय रहवासी बताते हैं कि मात्र 5 से 10 मिनट की बरसात में ही यहां की सड़कों पर घुटनों तक पानी जमा हो जाता है और अगर बरसात अधिक हो गई गई तो पानी कमर तक आ जाता है तथा कॉलोनी का मुख्य सड़क से संपर्क पूरी तरह कट जाता है। यह कटाव 3 से 5 दिन तक तो रहता ही है ।जलजमाव कि इस समस्या से निजात पाने एवं काम- चलाऊ सड़क एवं नाली की व्यवस्था के लिए कॉलोनीवासी, हर उस दरवाजे को खटखटा चुके हैं ,जहां उनकी फरियाद सुनी जा सकने की तनिक भी संभावना थी, पर अफसोस कि नगर के ‘नाकारा निजाम’ में जनता की ‘फरियाद नक्कारखाने की तूती ’ बन कर रह गई। बताना होगा की कॉलोनी की तंगहाल जनता ने कई दफे वार्ड पार्षद को जाकर अपनी दुश्वारियां बताई और पार्षद से मौका मौका मुआयना करने की गुजारिश भी की, मगर वे टस से मस नहीं हुए इतना ही नहीं कॉलोनी के रहवासी जब अपनी समस्या लेकर रुद्रपुर के मेयर की चौखट पर पहुंचे तो उन्होंने कॉलोनी को ही अवैध बता डाला।परेशान हाल कॉलोनी वासियों के  रुद्रपुर विधायक के दर पर पहुंचने पर बजट ना होने का दो – टूक सा जवाब मिला। और तो और ,बड़ी ही आशा के साथ लोगों ने कॉलोनी के हालात के फोटोग्राफ्रस खींचकर अपनी समस्या सूबे के मुख्यमंत्री के बहु प्रचारित पोर्टल पर भी प्रेषित की ,लेकिन नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ ही रहा। थक हार कर कॉलोनी वासियों में ने आपस में चंदा करके सड़कों पर मलवा  डलवाया, मगर यह नाकाफी रहा और हालात बद से बदतर होते चले गए। टावर कॉलोनी से जुड़ी एक बड़ी विडंबना यह है कि यहां निम्न से मध्यम आय वर्ग के लोग निवास करते हैं और इनमें अधिकांश अल्पसंख्यक वर्ग से हैं तथा यह बात तो जगजाहिर ही है कि गरीब होने के साथ साथ अल्पसंख्यक होना आज के दौर में ‘कोढ़ में खाज ’ वाली बात है। कदाचित यही कारण है की शहर की सरकार के ष्समूचे सिस्टमष् में टावर वाली कॉलोनी के निवासियों से सहानुभूति रखने वाला कोई नहीं है। यहां पर यह बताना जरूरी है कि कुछ माह पूर्व ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते समय, भारतीय जनता पार्टी के तमाम छोटे बड़े नेताओं व कार्यकर्ताओं से अल्पसंख्यकों के बीच में जाकर कार्य करने और उनका दिल जीतने का आ“वान किया था, पर जान पड़ता है जैसे रुद्रपुर के जनप्रतिनिधियों, जिनमें अधिकांश भारतीय जनता पार्टी से हैं, के कान में जूं भी नहीं  रेंगी। जाहिर है कि भाजपा छोटे- मझोले नेता ‘मोदी- मैजिक’ के सहारे चुनाव जीत कर सत्ता सुख भोगने में तो पूरी आस्था रखते हैं , लेकिन प्रधानमंत्री की समझाइश पर तनिक भी कान नहीं देते शायद यही कारण है कि धरातल में जनता के बीच कार्य करने में उनकी तनिक भी दिलचस्पी नहीं है।
मेयर रामपाल सिंह बोले –‘‘ संबंधित कॉलोनी अगर अनाधिकृत क्षेत्र में है तो हम वहां किसी भी किस्म का निर्माण कराने में असमर्थ हैं ।ऐसे क्षेत्र में निर्माण ना कराने के ऊपर से आदेश हैं । ऐसे क्षेत्रों में पानी की निकासी एक बड़ी समस्या है,लोगों ने नाली एवं नालों पर अतिक्रमण करके तीन -तीन मंजिला बिल्डिंग बना ली हैं। इस अनाधिकृत निर्माण को हटाने में अनेक वैधानिक एवं व्यवहारिक दिक्कतें हैं। सबसे खराब हालात निगम के वार्ड क्रमांक 1 एवं वार्ड 25 टावर वाली कालोनी के निवासियों को होने वाली दिक्कत का हवाला देते हुए जब ‘उत्तरांचल दर्पण’ ने मेयर से आमजन की समस्या हल करने की दिशा में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया, तो उन्होंने नगर निगम के इंजीनियर की टीम टावर कॉलोनी भेज कर सर्वे कराने एवं आवश्यक होने पर स्वयं मौका मुआयना करने का आश्वासन दिया। लिहाजा निगाहें अब इस पर रहेंगी निगम का अगला कदम क्या होता है?

पार्षद सुशील यादव बोले – ‘‘नगर निगम में सिग्नेचर अथॉरिटी मेयर हैं। मेयर की संस्तुति पर ही कार्य होता है। किसी वार्ड को कितना फंड आवंटित होगा और वहां कौन-कौन से कार्य होंगे ? यह आमतौर पर मेयर ही तय करते हैं । इस मामले में पार्षद की ज्यादा नहीं चल पाती। फंड आवंटित कराने के लिए पार्षद का नाम मेयर की गुड- बुक मे होना आवश्यक होता है। हम प्रस्ताव बनाकर नगर निगम में देते हैं, लेकिन मेरे वार्ड का अधिकतर हिस्सा सीलिंग में होने के कारण नगर निगम के उच्च अधिकारी कई बार मेरे प्रस्तावों को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। मेरा वार्ड काफी बड़ा है और क्षेत्रफल में लगभग दो वार्ड के बराबर है। तकरीबन 10,000 लोग मेरे वार्ड में निवास करते हैं ।मेरे वार्ड के क्षेत्रफल की तुलना में मुझे काफी कम फंड मिल पाता है ।वार्ड के क्षेत्रफल के हिसाब से ही वार्ड को फंड आवंटित करने की परंपरा नगर निगम में आरंभ होनी चाहिए। टावर वाली कॉलोनी की नाली एवं सड़क के निर्माण के लिए अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं रख पाया हूं ।कॉलोनी के लोग मेरे पास आए थे,मैं प्रयासरत हूं।

राजेंद्र सैनी -कॉलोनी की सभी सड़कों में गंदा पानी जमा है ।चारों तरफ मच्छरों की भरमार है ।पानी के कारण बच्चे स्कूल जाने से कतराते हैं ।बरसात में बच्चों का स्कूल जाना पूरी तरह बंद हो जाता है।  सड़क में पानी भरा होने के कारण कोई स्कूल वाहन बच्चों को लेने कॉलोनी के भीतर नहीं आता।
अजीजन- सड़क पर सड़क लगभग 8 महीने बाद कचरा लेने वाली गाड़ी आना शुरू हुई है ,लेकिन सड़क खराब होने के कारण गली के मुहाने पर खड़ी हो जाती है। लोगों को कचरा डालने के लिए अपने-अपने घरों से निकलकर ,पानी में छप- छप करते हुए गली के मुहाने तक जाना पड़ता है।
शहनाज बेगम- कॉलोनी के स्त्री एवं पुरुषों का एक जत्था मेयर साहब से फरियाद करने गया था। उन्होंने कहा की आप लोगों की कॉलोनी अवैध है। इसलिए निगम द्वारा आपके मोहल्ले में काम नहीं कराया जा सकता।
शान मोहम्मद- जब कहीं भी सुनवाई नहीं हुई तो हम लोगों ने अपनी समस्या मुख्यमंत्री जी के पोर्टल पर भी डाली पर वहां भी सुनवाई नहीं हुई। गरीब का दुख समझने वाला कोई नहीं है। सड़क नहीं बनने से काफी दिक्कतों का सामना रिना पड़ रहा है।
पप्पू- हम साधारण लोग हैं ।पार्षद जी तक ही हमारी पहुंच है। उनके पास गए थे। उन्होंने कहा अभी बजट नहीं है। जब बजट आएगा तो आपके यहां की नाली और सड़क भी बनवा देंगे लेकिन आज तक वार्ड की इस कालोनी में विकास कार्य नहीं हुए।
मरियम – सड़क में पानी भरा रहता है। हम लोग खेल तक नहीं पाते। स्कूल जाने में बड़ी परेशानी होती है। बारिश में स्कूल जाना बंद होता हो जाता है । सब जगह सड़क बन गई है हमारे यहां क्यों नहीं बनवाते। स्कूल जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
मिकी – हम लोग विधायक जी के पास भी फरियाद लेकर गए थे। विधायक जी ने कहा की इस समय हमारे पास  फंड नहीं है। 6-7 लाख रुपए का फंड था, वह खर्च हो गया। जब फंड आयेगा तो सड़क बनवाकर समस्या का निदान करेंगे।
बिट्ट- वार्ड में रहने वाले बिट्टू का कहना है कि कई बार पार्षद जी से निवेदन कर चुके हैं। नगर निगम के ऑफिस में भी दरख्वास्त लगा चुके हैं। बड़े खराब हालात हैं ,कॉलोनी के पार्षद और मेयर हमारी नहीं सुन रहे हैं।

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