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श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट के खिलाफ चल रहा बेदखली वाद खारिज

हरिद्वार। श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट के खिलाफ चल रहे बेदखली वाद को न्यायालय द्वितीय अपर जिला जज, हरिद्वार द्वारा विधि सम्मत न मानते हुये इसे निरस्त कर दिया है। यहां बता दे कि तत्कालीन नगर पालिका हरिद्वार द्वारा 1924 में रजिस्टर्ड पट्टा के माध्यम से 90 वर्ष के लिये श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट को प्रश्नगत भूमि पट्टे पर दी गई थी। पट्टे की भूमि पर पट्टेदार को अपने खर्च से भवन निर्माण का अधिकार भी दिया गया था। जिसके चलते श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट द्वारा उक्त भूमि पर आम जनता को समर्पित करते हुये चिकित्सालय, गोशाला और आश्रम सहित कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य कराये गये और निरन्तर मानव सेवा में जुड़ी रही। यही नही श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट द्वारा गंगा की सफाई के लिये समय-समय पर कई अभियान भी चलाये जाते रहे। संस्था द्वारा जनहित के कार्यो में हमेशा अग्रणीय भूमिका निभाई जाती रही। 90 वर्ष बाद लीज की अवधि के भीतर श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट के प्रबन्धकों द्वारा प्रश्नगत भूमि की लीज को बढ़ायें जाने के लिये लिखित पत्राचार किया गया लेकिन वर्तमान नगर निगम द्वारा इस पर कोई सुनवाई नही की गई जिस पर श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट के प्रबन्धकों द्वारा मनीआर्डर के माध्यम से लीज का एमाउण्ट नगर निगम में जमा करवा दिया गया। लेकिन नगर निगम द्वारा प्रश्नगत भूमि की लीज की अवधि नही बढ़ाई गई और नगर निगम बोर्ड में प्रस्ताव पास कर श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट के खिलाफ उक्त भूमि को खाली करने का नोटिस भेज दिया गया। यही नही नगर निगम द्वारा सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय में वाद दायर कर उक्त भूमि को खाली कराये जाने की मांग की गई। माननीय न्यायाधीश द्वारा दोनों पक्षों को सुनने के बाद यू0पी0पब्लिक प्रमिसस एक्ट 1972 के तहत कार्रवाई करते हुये श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट को पश्नगत भूमि से बेदखल करने का आदेश दे दिया गया। इस आदेश के खिलाफ श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट के प्रबन्धकों द्वारा जिला जज के यहां से स्टे आदेश ले लिया और इस आदेश के खिलाफ अपील भी दायर कर दी गई। श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ता अमित मेहन्दीरत्ता और अतुल सिंघल ने जोरदार पैरवी करते हुये अपने पक्ष में कई तथ्य रखे गये और पूर्व में न्यायालय द्वारा दिये गये कई निर्णयों को नजीर के रूप में पेश किया गया। न्यायालय द्वितीय अपर जिला जज, हरिद्वार के न्यायालय में 4 वर्ष तक चले मुकदमे के दौरान पक्षों को कई बार सुना गया। अन्ततः अपर जिला जज हरिद्वार मा0 भारत भूषण पाण्डेय ने अपीलार्थी को अप्रधिकृत अध्याशी ना मानते हुये यू0पी0पब्लिक प्रमिसस एक्ट 1972 के तहत की गई कार्रवाही विधित पोषणीय ना पाते हुये विद्वान नियत प्राधिकारी द्वारा पारित बेदखली वाद को निरस्त कर दिया। मा0 न्यायाधीश द्वारा दिये गये इस आदेश से श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट से लाखों की संख्या में जुड़ी संगत में हर्ष की लहर है। यहां बता दे कि श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट 500 वर्ष पुरानी संस्था है। इस संस्था के देश में कई स्थानों पर आश्रम बने हुये है और लाखों लोगों की आस्था इससे जुड़ी हुई है। श्री हरमिलाप साहिब ट्रस्ट के पक्ष में निर्णय आने से संगत काफी प्रसन्न है। हरिद्वार स्थित अधिकांश आश्रम और संस्थायें सरकार से मिली लीज की भूमि पर स्थित है। इस निर्णय से उन संस्थाओं को भी लाभ काफी मिलेगा।

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