February 11, 2026

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वोटबैंक की चिंता….!!सिर्फ तीन साल की मोहलत..

कैबिनेट के फैसले
देहरादून। लगता है सरकार को वोटबैक की चिंता सताने लगी है। प्रदेश के लगभग 11 लाख गरीब परिवारों को ध्वस्तीकरण अभियान से छूट देने का निर्णय लिया गया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद चार सप्ताह में अतिक्रमण हटाया जाना था। आखिरकार मलिन अस्तिवासियों के आक्रोश और विपक्ष की चेतावनी के बाद त्रिवेंद्र सरकार एक बार फिर बैकफुट पर आ गई हैं कैबनेट की बैठक में सरकार ने अध्यादेश को मंजूरी दे दी है।  अतिक्रमण विरोधी अभियान के सियासी असर से बचने के लिए और मलिन बस्तियों को बचाने के लिए प्रदेश कैबिनेट ने अध्यादेश लाने का फैसला लिया है। हालांकि फिलहाल कांग्रेस के जमाने में विधानसभा से पारित अधिनियम-2016 और उसकी नियमावली लागू रहेगी क्योंकि कैबिनेट ने इसे निरस्त करने का फैसला नहीं लिया है। बुधवार को सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में 12 मसले आए जिनमें से नौ पर र्चचा हुई और फैसले लिए गए। कैबिनेट बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री व शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा कि कांग्रेस के जमाने के कानून में काफी कमियां थीं और उसके कारण प्रदेशभर में 20 लोगों को भी मालिकाने का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसी को देखते हुए कैबिनेट ने ‘‘उत्तराखंड नगर निकाय एवं प्राधिकरणों हेतु विशेष प्राविधान अध्यादेश-2018’ लाने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि अध्यादेश लागू होने के तीन साल तक यथास्थिति बनी रहेगी। यह अध्यादेश 11 मार्च 2016 के बाद के अतिक्रमण व निर्माण आदि पर लागू नहीं होगा। यानी केवल पुरानी मलिन बस्तियों पर ही लागू होगा। मलिन बस्तीवासियों पर कोई सिविल या फौजदारी मामला दर्ज नहीं होगा। सरकार कोशिश करेगी कि मलिन बस्तीवासियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ दिया जाए। मलिन बस्तियों को दिए गए नोटिस पर कार्रवाई पर तीन साल तक के लिए रोक लग गई है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि अध्यादेश केवल मलिन बस्तियों के लिए है। शेष क्षेत्रों में अतिक्रमण विरोधी अभियान जारी रहेगा। इसी के साथ प्रदेश कैबिनेट ने चार व पांच अक्टूबर को प्रदेश में होने वाली इनवेस्टर्स समिट के लिए 25 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी भी दी है। कर्मचारियों के भत्तों को लेकर प्रकाश पंत की अध्यक्षता में हाईपावर कमेटी गठित : राज्य कर्मचारियों के सातवें वेतन मान के भत्तों और अन्य मसलों पर फैसले के लिए कैबिनेट ने वित्त मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में एक हाई पावर कमेटी गठित करने का फैसला लिया है। इस समिति में मुख्य सचिव व सचिव वित्त भी होंगे। यह कमेटी कर्मचारी संगठनों से उनकी मांगों को लेकर वार्ता करेगी और समाधान के लिए सरकार को सिफारिश करेगी। आईटीआई की गुणवत्ता सुधारने को विश्व बैंक से 500 करोड़ का कर्ज : प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) की गुणवत्ता व उनके स्तर में सुधार के लिए विश्व बैंक से 500 करोड़ का ऋण लिया जाएगा। इस ऋण से उद्योगों के साथ मिल कर आईटीआई की गुणवत्ता सुधारी जाएगी। इसके लिए 25 आईटीआई चुन लिए गए हैं। यह फैसला भी लिया गया है कि आईटीआई विभिन्न कायरे से जितनी कमाई करेंगे। प्रदेश सरकार अगले साल उस पूरी धनराशि को आईटीआई को सौंप देगी।ग्राम पंचायत विकास अधिकारी नियमावली में संशोधन : कैबिनेट ने उत्तराखंड ग्राम पंचायत विकास अधिकारी नियमावली में संशोधन का फैसला लिया गया है। पंचायत विकास अधिकारी की शैक्षिक अहर्ता में बदलाव कर दिया गया है। पहले इसके लिए कृषि, अर्थशास्त्र व वाणिज्य में स्नातक के साथ कंप्यूटर का सीसीसी सर्टिफिकेट जरूरी था लेकिन अब अहर्ता केवल किसी भी विषय में स्नातक या समकक्ष और सीसीसी को न्यूनतम योग्यता बनाया गया है यानी एमसीए, बीसीए आदि भी अब अर्ह होंगे।कोर्ट फीस अब ई-पेमेंट के जरिए भी : प्रदेश में कोर्ट फीस अब ई-पेमेंट के जरिए भी जमा की जा सकेगी। प्रदेश कैबिनेट ने न्यायालय शुल्क अधिनियम -2018 को मंजूरी दी है। अभी तक हाईकोर्ट व अन्य अदालतों में केवल कोषागार के चालान के जरिए ही न्यायालय शुल्क जमा किया जा सकता था। पुलिस एसआई व एएसआई नियमावली मंजूर : कैबिनेट ने पहली बार उत्तराखंड पुलिस उप निरीक्षक (एसआई) व सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) नियमावली को भी मंजूरी दी है। नियमावली में प्राविधान किया गया है कि एसआई के 34 फीसद पद सीधी भर्ती से, 33 फीसद प्रमोशन के जरिए और 23 फीसद पद विभागीय परीक्षा के जरिए भरे जा सकेंगे।आंगनबाड़ी वर्करों को दो रुपये बोनस : मदन कौशिक ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को महिलाओं व किशोरियो को सैनिटरी नैपकिन बांटने पर दो रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से बोनस दिया जाएगा। इसके लिए छह करोड़ रुपये का रिवाल्विंग फंड भी बनाने का फैसला लिया गया है। आंगनवाड़ी वर्कर जीईएम, स्वयं सहायता समूह और गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से ये सैनिटरी नैपकिन खरीद कर बांटती हैं। लखनऊ का पुनर्गठन आयुक्त कार्यालय बंद होगा : कैबिनेट ने लखनऊ स्थित पुनर्गठन आयुक्त कार्यालय बंद करने का फैसला लिया है। अब वहां कार्यरत चार कर्मचारियों को वापस उत्तराखंड बुला लिया जाएगा।

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