February 14, 2026

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बच्चों की फीस वसूलेंगे पब्लिक स्कूल,हाईकोर्ट ने जताई सहमति

नीताल । हाईकोर्ट ने कोरोना काल में प्राइवेट स्कूलों से फीस ना लेने के मामले पर गुरुवार को सुनवाई की। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि सरकार ने कक्षा 6 से 8 तक, 9वीं व 11वीं की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों से फीस लेने का आदेश जारी कर दिया है। कोरोना काल के दौरान इन कक्षाओं के बच्चों से कवेल टड्ढूशन फीस लेने का आदेश दिया गया था। कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद सरकार के फैसले पर सहमति जताते हुए याचिकाओं को निस्तारित कर दिया है। पिछली तिथि को याचिकर्ताओं द्वारा कोर्ट में कहा गया था कि 15 जनवरी को सरकार ने एक जीओ जारी कर 10वीं व 12वीं की कक्षा खोलने का आदेश दिया दिया था । यह भी कहा था कि उनसे फीस ले सकते हैं लेकिन चार फरवरी को सरकार ने फिर एक जीओ जारी कर छह से आठ और 9वीं व 11वीं के कक्षाएं खोलने का आदेश दिया था । इस जीओ में कहीं भी यह जिक्र नहीं था कि इन कक्षाओं के छात्रों से फीस लें। जिस पर कोर्ट ने पूर्व में सरकार से आज तक स्थिति साफ करने को कहा था। गुरुवार को सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि निजी स्कूलों को फीस लेने की अनुमति सरकार ने दे दी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चैहान, न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ में उधमसिंह नगर एसोसिएशन इंडिपेंडेंट स्कूलों की याचिका पर सुनवाई हुई। जिसमें कहा है कि राज्य सरकार ने 22 जून 2020 को एक आदेश जारी कर कहा था कि लाॅकडाउन के दौरान फीस के लिए प्राइवेट स्कूल किसी भी बच्चे का नाम नहीं काटेंगे। उनसे टड्ढूशन फीस के अलावा कोई फीस नहीं लेंगे, जिसे प्राइवेट स्कूलों ने स्वीकार भी किया। वहीं पहली सितम्बर 2020 को सीबीएसई बोर्ड ने सभी प्राइवेट स्कूलों को एक नोटिस जारी कर बोर्ड से संचालित सभी स्कूल 10 हजार स्पोर्ट फीस, 10 हजार टीचर ट्रेनिंग फीस और 300 रुपये प्रत्येक बच्चे के रजिस्ट्रेशन के तौर पर बोर्ड को चार नवम्बर से पहले जमा करने का आदेश जारी किया। यदि चार नवम्बर तक उक्त का भुगतान नहीं किया जाता है तो 2000 हजार रुपये प्रत्येक बच्चे के हिसाब से पेनाल्टी देनी होगी। जिसको एसोसिएशन द्वारा चुनौती दी गयी। एसोसिएशन का कहना है कि न तो वे किसी बच्चे का रजिस्ट्रेशन रदद् कर सकते, न ही उनसे टड्ढूशन फीस के अलावा कोई फीस ले सकते हैं। ऊपर से सीबीएसई बोर्ड द्वारा यह दवाब डाला जा रहा है, इस पर रोक लगाई जाए। इस समय न तो टीचर्स की ट्रेनिंग हो रही है न ही कोई स्पोट्र्स हो रहे हैं। बोर्ड द्वारा संचालित स्कूल तो बोर्ड और राज्य के बीच मे फंस गए हैं, अगर वे बच्चों से ये फीस लेते हैं तो उनके स्कूलों का रजिस्ट्रेशन रद होने की संभावना है।

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