February 14, 2026

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बड़ी खबर..योगी और त्रिवेंद्र सरकार को स्रुपीम कोर्ट ने भेजा नोटिस

लव जिहाद और धर्म परिवर्तन कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से किया इनका
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने लव जिहाद और धर्म परिवर्तन केखिलाफ बने कानूनों पर नोटिस जारी किया है साथ ही कोर्ट ने यूपी और उत्तराखंड सरकार से 4 हफ्रते में जवाब मांगा है। याचिकाओं में इन कानूनों को सम्मान के साथ जीवन जीने और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हनन बताया गया है। चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने सबसे पहले याचिकाकर्ता विशाल ठाकरे के वकील प्रदीप यादव ने दलीलें ररखी।उन्होंने यूपी के कानून को संविधान के खिलाफबताया। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, अगर कानून में कोई दिक्कत है, तो आपको पहले हाई कोर्ट जाना चाहिए हमारी जानकारी के मुताबिक हाई कोर्ट पहले से मसले की सुनवाई कर रहा है। यादव ने बात को संभालते हुए कहा, हमने उत्तराखंड के भी कानून को चुनौती दी है। अगर दो हाई कोर्ट किसी मामले को सुन रहे हों, तो उसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में किया जाना बेहतर है। इस दलील से असहमति जताते हुए चीफ जस्टिस ने कहा, हमारे सामने कोई ट्रांसफर याचिका नहीं है। आपने नई जनहित याचिका दाखिलकी है। इसके बाद एक और याचिकाकर्ता एनजीओ सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस के की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील सी यु सिंह ने कहा, 2 राज्यों ने कानून बना दिए हैं। मध्य प्रदेश और हरियाणा भी और हरियाणा भी जल्द ही ऐसा कानून पास करने जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट को पूरे मामले को देऽना चाहिए। बेंच ने कहा, हम यह नहीं कह रहे कि यह मामला देखा जाने लायक नहीं है। लेकिन सुनवाई हाई कोर्ट में ही किया जाना बेहतर होता। बहरहाल, हम मामले में यूपी और उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर रहे हैं। सी यु सिंह ने कोर्ट से दोनों कानूनों पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा, इन कानूनों में 10 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। बेगुनाही साबित करने का जिम्मा आरोपी पर डाला गया है। यह बाध्यता रखी गई है कि विवाह करने से 1 महीने पहले मजिस्ट्रेट को सूचना देनी होगी। यह सभी बातें मौलिक अधिकारों का हनन हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलों को सुना लेकिन कानूनों पर रोक लगाने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा, हम सभी पक्षों को सुनकर यह तय करेंगे कि कानून संविधान के हिसाब से सही हैं या नहीं। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से अगली सुनवाई जल्द करने की दरख्वास्त की। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह दोनों राज्यों को 4 हफ्रते में जवाब देने के लिए कहेगा।

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