February 15, 2026

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मांगों को लिखित में सरकार के सामने रखा,प्रकाश सिंह बादल ने लौटाया पद्य विभूषण

नई दिल्ली। नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है। दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार और किसानों के बीच की चर्चा शुरू हो गई है। किसानों ने अपनी मांगों को लिखित में सरकार के सामने रखा है, अब हर किसी की नजर इस बैठक पर है। दिल्ली- नोएडा, दिल्ली-गुरुग्राम की सीमा पर लंबा जाम लगा हुआ है, यहां किसानों का प्रदर्शन लगातार हो रहा है। किसानों के प्रदर्शन के बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चैधरी ने किसानों के आंदोलन के मसले पर संसद बुलाने की मांग की है। दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार और किसानों के बीच की चर्चा शुरू हो गई है। किसानों ने अपनी मांगों को लिखित में सरकार के सामने रखा है, अब हर किसी की नजर इस बैठक पर है। कृषि मंाी नरेंद्र तोमर का कहना है कि आज किसानों से चैथे दौर की चर्चा हो रही है, उन्हें उम्मीद है कि सकारात्मक नतीजा निकलेगा। पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की गृहमंाी अमित शाह के साथ बैठक के बाद कैप्टन ने कहा कि उनका किसानों और सरकार के बीच चल रही वार्ता में कोई रोल नहीं है और ये सिर्फ किसानों और सरकार के बीच है। उन्होंने ये भी कहा कि मैंने अमित शाह जी से अपना विरोध जता दिया है और उनसे कहा है कि इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाया जाए क्योंकि इसका मेरे राज्य और देश पर बुरा असर पड़ा रहा है। सरकार और किसान संगठन के नेताओं के बीच विज्ञान भवन में चैथे दौर की बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में 30 से ज्यादा किसान संगठनों के नेता शामिल हैं। सरकार की ओर से केंद्रीय मंाी पीयूष गोयल और केंद्रीय कृषि मंाी नरेंद्र सिंह तोमर मौजूद हैं।किसानों ने सरकार के सामने जो ड्राफ्ट भेजा है, उसमें इन मुद्दों को उठाया है कि तीनों कृषि कानून वापस लिए जाएं। वायु प्रदूषण के कानून में बदलाव वापस हो। बिजली बिल के कानून में बदलाव है, वो गलत है। एमएसपी पर लिखित में भरोसा दे। काॅन्ट्रैक्ट फार्मिंग पर किसानों को ऐतराज। किसानों ने कभी ऐसे बिल की मांग की ही नहीं, तो फिर क्यों लाए गए। ये सिर्फ कारोबारियों का फायदा है।डीजल की कीमत को आधा किया जाए। किसानों और सरकार के बीच बैठक से पहले कृषि मंाी नरेंद्र सिंह तोमर, अमित शाह से मिलने पहुंचे हैं। किसानों ने एक ड्राफ्ट में कुल आठ मांगों को रखा है, जिसपर मंथन हो रहा है। आज की बैठक में कुल 40 किसान संगठन शामिल होंगे। किसान संगठनों की ओर से केंद्र सरकार को आपत्तियों की लिस्ट सौंप दी गई है। किसानों ने कृषि कानून के साथ-साथ वायु गुणवत्ता अध्यादेश और प्रस्तावित बिजली ;संशोधनद्ध बिल को लेकर भी आपत्तियां बताई जताई हैं। इधर किसानों का आंदोलन जारी है और अब किसान संगठनों ने दो टूक कह दिया कि सरकार को ये कानून वापस लेने ही होंगे। दूसरी ओर सरकार भी किसानों की शिकायतें दूर करने के लिए तैयार है, लेकिन कानून पर टस से मस नहीं होना चाहती है। ऐसे में स्थिति गंभीर होती जा रही है, क्योंकि किसानों का कहना है कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो फिर आंदोलन आक्रामक हो जाएगा। भारतीय किसान यूनियन के किसान राकेश टिकैत का कहना है कि अगर आज सरकार मांगें नहीं मानती है, तो आंदोलन हाथ से बाहर निकल जाएगा। किसानों के प्रदर्शन के कारण सिंधु बाॅर्डर, टिकरी बाॅर्डर, चिल्ला बाॅर्डर समेत कई बाॅर्डर को बंद कर दिया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है। इसके मुताबिक, गुरुवार को भी नोएडा लिंक रोड पर स्थित चिल्ला बाॅर्डर को बंद रखा गया है। यहां पर गौतम बु( द्वार पर सैकड़ों किसान सड़क जाम करके बैठे हैं। कृषि कानून के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के किसानों का प्रदर्शन जारी है और अब इन्हें गुजरात के किसानों का भी समर्थन मिल गया है। दिल्ली में गुजरात से काफी संख्या में किसान पहुंचे हैं।
किसानों के समर्थन में प्रकाश सिंह बादल ने लौटाया पद्य विभूषण
नई दिल्ली। पंजाब के पूर्व मुख्यमंाी और अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल ने किसानों के समर्थन में अपना पप्र विभूषण सरकार को वापस लौटा दिया है।पिछले करीब एक हफ्ते से ज्यादा वत्तफ से हजारों की संख्या में किसान दिल्ली बाॅर्डर पर डटे हुए हैं। किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार हाल ही में लागू किए गए कृषि कानूनों को वापस ले। इसको लेकर किसान और केंद्र सरकार के बीच बैठक भी हुई, जो कि बेनतीजा रही। इस बीच शिरोमणि अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल ने किसानों के समर्थन और कृषि कानूनों के विरोध में अपना पप्र विभूषण सम्मान सरकार को वापस लौटा दिया है।अपने सम्मान को लौटाते हुए प्रकाश सिंह बादल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्टी लिखी है। करीब तीन पन्नों की इस चिट्टी में प्रकाश सिंह बादल ने केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का विरोध किया है। इसके साथ ही सरकार की ओर से किसानों पर की गई कार्रवाई की भी निंदा की गई है। साथ ही चिट्टी में ही उन्होंने अपना पप्र विभूषण सम्मान वापस लौटाने की बात कही है। बता दें कि अकाली दल की ओर से लगातार केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का विरोध किया जा रहा है। इससे पहले कृषि कानूनों का विरोध करते हुए केंद्र सरकार में मंाी हरसिमरत कौर बादल ने अपने केंद्रीय मंाी पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में अकाली दल ने किसानों का समर्थन करते हुए एनडीए से अलग होने का ऐलान किया था। वहीं अब प्रकाश सिंह बादल ने अपना पप्र विभूषण सम्मान सरकार को वापस लौटा दिया है।

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