February 14, 2026

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स्पेशल यूनिफाॅर्म को बड़ी तादाद में लद्दाख पहुंचा रही सेना

नई दिल्ली।वायुसेना के ग्लोबमास्टर एयरक्राफ्ट से राशन के साथ-साथ बड़ी तादाद में सैनिक एलएसी पर पहुंचाएं जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लद्दाख की जलवायु यानि बेहद कम आॅक्सीजन और हाई आॅल्टिटड्ढूज इलाके को देखते हुए सैनिकों को एक हफ्ते का एक्लेमिटाईजेशन कराया जाता है। पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर चीन के खिलाफ भारत ने सर्दियों के लिए अपनी कमर कस ली है। भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर थलसेना खाने-पीने के सामान के साथ साथ राशन, तेल, टेंट और स्पेशल यूनिफाॅर्म को बड़ी तादाद में लद्दाख पहुंच रही है। सी-17 एयरक्राफ्ट राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ से ये सारा सामान यहां लद्दाख लाया जा रहा है। ये सारा सामान डिफेंस फोर्सेज यानि भारत के सैनिकों के लिए हैं जो इस वक्त चीन के खिलाफ लाइन आॅफ एक्चुयल कंट्रोल ;एलएसी पर तैनात हैं। इनमें पानी की मिनरल बोतल, जूस, खास आर्टिक टेंट और दूसरा सामान है। इन विमानों से सारा सामान खास ट्रकों में अनलोड किया जा रहा है। ट्रकों से इस सामान को चिनूक हेवीलिफ्ट हेलीकाॅप्टर्स में लोड किया जा रहा है। दरअसल, फाॅरवर्ड एयरबेस से एलएसी की दूरी करीब 100-150 किलोमीटर है। इसलिए सैनिकों की रसद और दूसरे सामान को चिनूक हेलीकाॅप्टर से भेजा जा रहा है। हाल ही में भारत ने इन 22 चिनूक हेलीकाॅप्टर्स को अमेरिका से लिया था और पिछले चार महीने से ये हेलीकाॅप्टर्स भारतीय सेना के लिए वर्क-हाॅर्स बने हुए हैं। रसद और राशन ले जाने से लेकर तोप और एंटी- एयरक्राफ्ट गन्स तक ये चिनूक हेलीकाॅप्टर्स टेक्टिकल पोजिशन्स पर पहुंचा रहे हैं। वायुसेना के ग्लोब मास्टर एयरक्राफ्ट से राशन के साथ -साथ बड़ी तादाद में सैनिक एलएसी पर पहुंचाएं जा रहे हैं। लद्दाख की जलवायु यानि बेहद कम आॅक्सीजन और हाई आॅल्टिटड्ढूज इलाका को देखते हुए सैनिकों को एक हफ्ते का एक्लेमिटाईजेशन कराया जाता है। उसके बाद ही उन्हें फाॅरवर्ड लोकेशन पर भेजा जाता है। आपको बता दें कि इस वक्त पूर्वी लद्दाख से सटी 826 किलोमीटर लंबी एलएसी पर भारत के करीब 50 हजार सैनिक तैनात हैं। लेकिन जरूरत पड़ने पर और भी सैनिकों को मैदानी इलाकों से यहां तैनात किया जा सकता है। फाॅरवर्ड एयरबेस पर सिर्फ मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के ही आॅपरेशन्स ही नहीं चल रहे हैं। बल्कि फाइटर जेट्स और अटैक हेलाकाॅप्टर्स भी दिन-रात अपने मिशन में लगे रहते हैं। भारतीय वायुसेना के सुखोई, मिग29, रफाल, मिराज2000 और एलसीए तेजस लड़ाकू विमान दिन-रात लद्दाख से सटी एलएसी पर काॅम्बेट एयर पैट्रोलिंग करते रहते हैं। इसके अलावा हाल ही में अमेरिका से लिए गए अपाचे अटैक हेलीकाॅप्टर्स भी इस फाॅरवर्ड एयरबेस पर आॅपरेशंस कर रहे हैं। इसके तहत एलएसी के उन पहाड़ों पर ये पैट्रोलिंग कर रहे हैं जो फाइटर जेट्स की जद में नहीं आ पाते। लद्दाख में सर्दियों के दिनों में 30-40 हजार अतिरिक्त घ्घ्सैनिकों की तैनाती पर प्रति माह 8,000 करोड़ रुपये ;1.8 बिलियन डाॅलरद्ध खर्च होने का अनुमान है, जिसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। 9000 से 12000 फीट की ऊंचाई तक तैनात सैनिकों को एक्सट्रीम कोल्ड क्लाइमेट ;ईसीसीद्ध क्लोदिंग दी जाती है। इससे ज्यादा ऊंचाई पर तैनात सैनिकों को स्पेशल क्लोदिंग एंड माउंटेनियरिंग इक्विपमेंट ;एससीएमईद्ध दिए जाते हैं। एक जवान को एससीएमई देने पर करीब 1.2 लाख रुपये तक खर्च आता है। एलएसी पर तैनात सभी सैनिकों के लिए क्लोदिंग सहित सभी जरूरी सामान पहुंचा दिया गया है और रिजर्व स्टाॅक भी भेजने का काम जारी है। एक अधिकारी ने बताया कि अग्रिम चैकियों पर तैनात सैनिकों को स्पेशल राशन दिया जाता है। दरअसल अत्यधिक ऊंचाई पर तैनात सैनिकों को ज्यादा भूख नहीं लगती लेकिन उन्हें सही पोषण और जरूरी कैलरी देने के लिए हर दिन 72 आइटम दिए जाते हैं, जिसमें से वह अपनी पसंद की चीज चुन सकते हैं।

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