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परिनिर्वाण दिवस पर डा. अम्बेडकर का भावपूर्ण स्मरण

रुद्रपुर/काशीपुर(उद संवाददाता)। आज 63वे परिनिर्वाण दिवस पर महानगर कांग्रेस कमेटी द्वारा डाॅ भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यर्पण कर मनाया।  प्रदेश महामंत्री हिमांशु गाबा ने कहा कि बाबा साहब को किसी भी जाति धर्म मे बांकर नही देखा जा सकता। बाबा साहब ने सभी जाति धर्म के लोगों को साथ लेकर संविधान का निर्माण किया और दलितों को ऊपर उठाकर सबके साथ चलने की कोशिश की। इसीलिए आज हमारे देश के सविधान को दुनिया मे सबसे अग्रणी माना जाता है। महामंत्री पुरषोत्तम अरोरा ने कहा कि बाबा साहब ने हमारे देश को एक सर्वाेत्तम संविधान दिया। देश  बाबा साहब को हमेशा याद रखेगा। हम सभी को बाबा साहब के बताये मार्ग पर चलना चाहिए। इस दौरान राजीव कामरा, बाबू खान, सोनू खान, कैलाश राठार, निसार खान, कलीम अहमद, इंद्रजीत सिंह, फैजराज खान, विजय अरोरा आदि थे। काशीपुर- संविधान रचयिता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के 64वें महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर विभिन्न संगठनों ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। प्रातः महेश पुरा रोड  स्थित कांग्रेस नेता  शफीक अहमद अंसारी  के प्रतिष्ठान पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  यहां दलित मुस्लिम एकता मंच के बैनर तले सामाजिक व राजनीतिक संगठनों से जुड़े दर्जनों कार्यकर्ताओं ने बाबा साहब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।  वत्तफाओं ने कहा कि देश की आजादी में बाबा साहब का दिया योगदान अविस्मरणीय है।  इस मौके पर आरबी सिंह, शिवनंदन टाक, सुनील महाजन, जितेंद्र देवांतक, मोहम्मद यामीन, आरिफ खान, मोहम्मद अशरफ, मोहम्मद नासिर, हरिओम सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे। इधर टांडा उज्जैन स्थित अंबेडकर भवन में भी बाबा साहब के महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर उनके अनुयायियों ने उन्हें स्मरण कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।उधर जन जीवन उत्थान समिति द्वारा विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। अधिवत्तफा शैलेंद्र मिश्रा ने कहा कि संविधान रचयिता डाॅ. अंबेडकर ने 1950 में भविष्य के भारत को चेतावनी दी थी उन्होंने कहा था कि हमें केवल राजनीतिक लोकतंत्र मिलने पर खुश नहीं होना चाहिए भले ही अंग्रेज चले गए हो पर हमारा समाज अभी भी असमानताओं और भेदभाव से ओतप्रोत है। हम जब तक धार्मिक और सामाजिक बराबरी दूर नहीं करेंगे समाज में एक रुपता नहीं होगी बाबा साहब हमारे लिए प्रांसगिक से रहेंगे उससे भी अधिक जितने वह आजादी की लड़ाई में प्रासंगिक थे डाॅ. अंबेडकर ने सच्चाई और अस्पृश्यता के दर्द को खुद भी झेला था वह दलित और निचली जातियों के लिए एक मिसाल थे।

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