February 11, 2026

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आखिर कब तक खतरनाक जंगलों की भेंट चढ़ती रहेंगी बेटियां?

कपकोट। पहाड़ी क्षेत्रें के जंगलों में घास काटने जा रही महिलाएं आयेदिन हादसों का शिकार हो रही हैं। एक ओर जहां जंगलों में जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है वहीं जानलेवा पहाड़ियां भी खतरा बनी रहती हैं जिस कारण आयेदिन किसी न किसी महिला को अपनी जान गंवानी पड़ती है। गत दिनों भी जंगल में घास काटने गयी एक नवविवाहिता की पहाड़ी से गिरकर मौत हो गयी। जानकारी के अनुसार बिल्थी पन्याती गांव निवासी खिला देवी (22) पत्नी विनोद सिंह गावं से दूर जंगल में एक अन्य महिला के साथ जानवरों के लिए घास काटने पहाड़ी पर गई थी। बताया जा रहा है कि घास काटते वक्त उसका पैर फिसला और वह पहाड़ी से नीचे गिर गई। जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई। राहगीरों ने महिला को अचेतावस्था में देखा तो दौड़कर पास गए और परिजनों को सूचित किया। परिजन उसे गंभीर हालत में सीएचसी कपकोट ले गए। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। एसआई गोपाल राम ने बताया कि तहसीलदार मैनपाल सिह की उपस्थिति में शव का पोस्टमार्टम कराया गया। शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्तपाल भेज दिया गया है। खिला और विनोद सिह की शादी को अभी मात्र साल भर ही बीते थे। 12 मई 2017 को दोनों की शादी हुई थी। पति नौकरी के सिलसिले में दिल्ली में रहकर काम करता था। कई महीने बाद वह बुधवार को ही घर पहुंचा था। मृतका खिला बेहद मेहनती और संस्कारी लड़की थी। उसके माता पिता ग्राम पुड़कूनी में रहते हैं। खिला की तीन छोटी बहिनें है और एक भाई है। पिता उमेद सिंह और माता गीता देवी गांव में ही मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं है जबकि उन्होंने मेहनत मजदूरी कर अपनी लाडली खिला का विवाह पिछले वर्ष ही संपन्न कराया था। खिला पिछले सप्ताह ही अपने मायके आयी थी। खिला का स्वभाव शर्मीला था वह शादी से पहले भी घर का पूरा कामकाज अकेले ही संभालती थी। माता पिता के साथ ही आस पड़ोंस के लोग भी उससे वेहद लगाव रखते थे। लेकिन बृहस्पतिवार की सुबह ससुराल से जब खिला को गंभीर चोट लगने की खबर उसके मायके पुड़कूनी में परिजनों को मिली तो घर में कोहराम मच गया। खिला के माता पिता बेहद गमजदा हैं। खिला की मौत से उसकी सहपाठी सहेलियां भी बेहद गमगीन हैं।
नवविवाहिताओं को अकाल मौत से बचाने की जरूरत
कपकोट । सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्रें में कामकाजी महिलाओं के लिये परिस्थितियां बेहद जटिल हैं। महिलाओं को सुबह से ही अपनी दिनचर्या के लिये कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। पन्याती में हुई इस बेटी की मौत कई सवालों को भी कुरेद रही हैं। इस घटना से जहां हर कोई गमजदा है वहीं परिजनों की भी गंभीर लापरवाही सामने आयी है। अगर जंगल में खिला के साथ अन्य महिलायें भी साथ होती तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। महिलाओं के लिये चारा,घास, लकड़ी के लिये जंगलों में जाना उनकी रोज की नियति सी बन गई है। पहाडी क्षेत्रें में कामकाज के लिये बेटी बहुओं के साथ ही परिजनों को भी अपनी मानसिकता बदलनी होगी। तभी भविष्य में खिला जैसी मासूम बेटियों को अकाल मौत से बचाया जा सके। बरसात के मौसम में अक्सर घटनायें सामने आती हैं। समय के बदलते दौर में आये दिन नवविवाहिताओं के साथ इस प्रकार के हादसे होते रहते हैं। जिला प्रशासन के अधिकारियों को इस दिशा में गांव गाव में जाकर जागरूकता अभियान चलाने चाहिये। महिलायें संगठित होकर जंगल में जायें। घरेलू काम करने के बोझ तले दबी अनेक महिलायें जंगल में हादसे का शिकार हो चुकी हैं। जंगली जानवरों के हमले, पेड़ व पहाड़ी से गिरने की घटनायें आम हो गई है। कुछ बुजूर्ग लोगों का कहना है कि पहाड़ में नयी बहू बेटियों को इस तरह अकेले जंगल नहीं भेजना चाहिये। पहले की महिलायें सक्षम होती थी और संमूह बनाकर जंगल में जाती थी। गांव वालों के साथ ही यहां के सामाजिक लोगों का कहना है कि गरीब परिवार की इस बेटी की मौत ने सभी को सचेत कर दिया है। सभी को अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिये जागरूक होना चाहिये। ग्रामीणों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से खिला के परिजनों को आर्थिक मदद पहुंचाने की गुहार लगायी ।

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