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लालपुर,(उद संवाददाता)। यहां स्थित एक प्लाईवुड फैक्ट्री में काम कर रही महिला देर रात मशीन की चपेट में आने के बाद कैमिकल से भरे गड्ढे में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गयी। आरेाप है कि देर रात हादसे के बाद प्रबंधन ने न तो महिला को अस्पताल पहुंचाया और न ही रात में उसके परिजनों को सूचना दी। सुबह छह बजे तक महिला घायल अवस्था में फैक्ट्री में ही तड़पती रही। सुबह सूचना मिलने पर महिला का पुत्र फैक्ट्री पहुंचा और अपनी मां को अस्पताल ले गया। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी। परिवार वालों का आरोप है कि प्रबंधन ने समय पर उसे अस्पताल पहुंचाया होता तो उसकी जान बच सकती थी। जानकारी के अनुसार रामेश्वरपुर निवासी 45वर्षीय सावित्री पत्नी रामविलास गांव की एक प्लाइवुड फैक्ट्री में ठेकेदार के अधीन काम करती थी। बुधवार रात वह आठ बजे ड्यूटी करने के लिए प्लाईवुड फैक्ट्री पहुंची। उसकी ड्यूटी रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक थी। बताया गया है कि रात में उसे रोजाना की तरह मशीन पर काम करने के लिए लगाया गया था । देर रात काम करते समय अचानक उसकी साड़ी मशीन की चपेट में आ गयी जिससे वह संतुलन खो बैठी और पास ही स्थित कैमिकल के गड्ढे में जा गिरी। वहां मौजूद अन्य कर्मियों ने उसे फैक्ट्री के गोदाम में ही आराम करने के लिए लेटा दिया। घायल महिला को न तो अस्पताल पहुंचाया गया और न ही उसके उपचार की फैक्ट्री में ही कोई व्यवस्था की गयी। आरोप है कि उपचार के अभाव में रात भर महिला फैक्ट्री में ही तड़पती रही। घटना की सूचना उसके घर पर प्रातः छह बजे दी गयी। घटना की सूचना पर महिला का पुत्र सोनू आनन फानन में फैक्ट्री पहुंचा और वहां से मां को घायल अवस्था में लेकर निजी अस्पताल पहुंचाया। जहां उपचार के दौरान बृहस्पतिवार को सावित्री ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दिये बिना ही अंतिम संस्कार भी कर दिया। मृतका के पुत्र सोनू का कहना है कि फैक्ट्री प्रबंधन अभी तक उनके घर सांत्वना देने तक नहीं पहुंचा है। सोनू का आरेाप है कि फैक्ट्री में जिस वक्त हादसा हुआ उसी वक्त उसकी मां को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। लेकिन प्रबंधन ने संवेदनहीनता दिखाते हुए उसकी मां को तड़पता हुआ छोड़ दिया। इधर मामले को लेकर जिला पंचायत सदस्य रंजीत कुमार ने फैक्ट्री प्रबंधन की संवेदनहीनता पर नाराजगी जताते हुए मामले में पुलिस से कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन की लापरवाही से महिला की जान गयी है। यदि समय रहते महिला को उपचार मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। उन्होंने कहा कि मामले में मृतका के पुत्र की ओर से तहरीर देने की तैयारी की जा रही है।
12 घंटे की ड्यूटी वेतन पांच हजार
रूद्रपुर। प्लाईवुड फैक्ट्रियों में महिला श्रमिकों का किस कदर शोषण हो रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण लालपुर की फैक्ट्री में सामने आया है। फैक्ट्री में हुए हादसे में जान गंवाने वाली महिला सावित्री के पुत्र सोनू ने बताया कि उसकी मां पिछले करीब एक वर्ष से फैक्ट्री में काम कर रही थी। उसने बताया कि ठेकेदार के अधीन उसकी मां से 12 घंटे काम लिया जाता था और महीने का वेतन मात्र पांच हजार रूपये ही दिया जाता था। फैक्ट्री में महिला की मौत से कई अन्य सवाल भी खड़े हुए हैं। बताया जाता है कि फैक्ट्री में श्रम कानून ताक पर रखे जा रहे हैं। इस सम्बंध में सहायक श्रमायुक्त उमेद सिंह चैहान से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि नियमानुसार फैक्ट्री में हिलाओं से नाइट ड्यूटी कराने पर सम्बंधित अधिकारी से अनुमति लेनी होती है। साथ ही हिलाओं की ड्यूटी के दौरान सुरक्षा और उन्हें घर से ले जाने और घर तक छोड़ने की व्यवस्था भी नियोक्ता को ही करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि जिस फैक्ट्री में हादसा हुआ है वहां पर महिलाओं की नाईट ड्यूटी के लिए अनुमति ली गयी थी या नहीं यह जांच का विषय है।

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