February 13, 2026

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कौन उतारे..जेठ का घुंघट ?? पहले लोकायुक्त,फिर सबूत!!

@Narendra Baghari (Narda)
लोकायुक्त की नियुक्ति के संदर्भ में दिया था बयान: इंदिरा
देहरादून। बहुचर्चित स्टिंग किंग उमेश के बाहर आते ही अब आयुष गौड़ के स्टिंग कांड का भंडाफोड़ जल्द हो सकता है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखरी दिन लोकायुक्त के मुद्दे पर छिड़ी बहस अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा के बीच बड़ी सियासी जंग का रूप ले सकता है। इतना ही नहीं जिस लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस अस्तीनें चढ़ाकर प्रचंड बहुमत की भाजपा सरकार से सवाल पूछ रही है जिसने स्वयं चुनाव में 100 दिन में लोकायुक्त कानून बनाने का वादा किया था। सरकार गठन के बाद डेढ़ वर्ष बाद भी सरकार ने अब तक अपना वायदा पूरा नहीं किया है। वहीं सदन में सरकार को घेरेने के बाद मुख्यमंत्री के चैलेंज पर इंदिरा ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होनें लोकायुक्त की नियुक्ति के संदर्भ में यह बयान दिया था। वहीं पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी स्टिंग के खुलाले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला शुरू कर दिया है। बहुत स्टिंग स्टिंग स्टिंग हो रही है, पहले भी स्टिंग हुए, लगता है जो पहले स्टिंग हुए वो देवर थे और इस बार जो स्टिंग हुआ है वो जेठ है क्योंकि कोई भी व्यक्ति या महिला जेठ का मुंह नहीं देखना चाहती है, स्टिंग को घूंघट में ही रखना चाहते हैं। हरदा ने एक पोस्ट में यह बयान दिया है। जिसका सीधा निशाना भाजपा पर है। लोकायुक्त गठन की मांग को तेज करते हुए कांग्रेस ने इसे प्रदेश में बहुचर्चित व सत्तासीन भाजपा नेताओं के करीबियों और अफसरों का तथाकथित रूप से भ्रष्टाचार के स्टिंग आॅपरेशन करने के आरोपी जो अब जमानत पर बाहर है एक वरिष्ठ पत्रकार का नाम भी जोड़ते हुए नेता प्रतिपक्ष ने अब सीधे त्रिवेंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। वहीं नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा भी स्टिंग कांड को हवा देकर आगामी चुनाव इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी मे है। सदन में भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए इंदिरा स्टिंग किंग को जेल में डालने का भी आरोप लगा चुकी है। जिसके बाद माना जा रहा है कि कहीं उमेश के स्टिंग कहीं सचमुच अब विपक्ष के पास तो नहीं पहुंचा दिये गये है। वहीं इंदिरा के दावों पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं कि अगर वाकई सबूतों की काफपी उनके पास है तो फिर नेता प्रतिपक्ष इतनी आसानी और राजनीतिक रूप से इस संवेदनशील मुद्दे को नहीं उठाती। सियासी गलियारों में चर्चायें तो यहां तक हो रही है कि पिछली सरकार में तथाकथित समाचार चैनल के मालिक कग्रेस की हरीश रावत सरकार में भी विवादों में रह चुका है जिसका साथ हासिल कर डा. इंदिरा आगामी चुनाव में भाजपा से मुकाबले और भ्रष्टाचार को लेकर बड़ी रणनीति भी बना सकती है। वहंी कांग्रेस सरकार में हुए एनएच घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की मांग को भी सरकार ने सीधे तौर पर स्वीकार नहीं किया जबकि एसआईटी के जरिये अब तक सिर्फ सरकारी अफसरों पर ही गाज गिराने तक सीमित रही। इस घोटाले के मास्टरमाईंड समेत तथाकथित सफेदपोशों तक सरकार की जांच एजेंसी अब तक हाथ नहीं डाल पायी है। इस घोटाले को लेकर भी कई बार नेता प्रतिपक्ष इंदिरा सवाल उठा चुकी है। कुलमिलाकर देखा जाये तो नेता प्रतिपक्ष इंदिरा अब भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आक्रामक रूख अख्तियार कर चुकी है। इंदिरा के बयान के बाद सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने उनके दावों को महज सियासी सिगूफा बताते हुए खुली चुनौती भी दे दी है। उल्लेखनीय है कि नवंबर में एक चैनल के सीईओ उमेश जे कुमार को नोएडा से गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उसने स्टिंग करके सरकार को तथाकथित तौर पर अस्थिर करने की कोशिश की। उमेश की स्टिंग टीम के सदस्य आयुष गौड़ ने बताया था कि उमेश मुख्यमंत्री का स्टिंग कराने की कोशिश कर रहा था, लेकिन ऐन मौके पर वह कैमरे सीएम आवास ले जाने में डर गया था। उमेश ने उसे कहा दिया था कि सीएम के अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश को कुछ पैसे पकड़ाते हुए स्टिंग कर लो या कुछ ऐसा कहलवा लो जिससे मुख्यमंत्री को दबाव में लिया जा सके। मुख्यमंत्री के करीबियों को इसके लिए निशाना बनाया गया। उमेश की गिरफ्तारी के बीच स्टिंग से जुड़ी कुछ आडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई, जिसमें उमेश से मिलती जुलती आवाज वाला व्यक्ति आयुष गौड़ से स्टिंग को लेकर खुली र्चचा कर रहा है। आडियो में सीएम को ब्लैकमेल करने या स्टिंग के वीडीओ किसी को बेचने की बातें भी हो रही हैं।
त्रिवेंद्र ने किया चैलेंज,परेड मैदान में बड़े स्क्रीन पर दिखा ले स्टिंग
देहरादून। बहुचर्चित स्टिंग कांड मामले में सत्तासीन भाजपा नेताओं के खिलाफ सबूतों की काॅपी ‘सबूत’ हासिल करने के कांग्रेस के दावे के बाद सूबे की सियासत में जबरदस्त उठापटक शुरू होने की आशंका है। सरकार और विपक्ष के बीच जबरदस्त बहस सी छिडी़ हुई है। एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोपों के बीच अब खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी पलटवार किया है। सीएम ने नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश को चुनौती दी है कि उनके पास स्टिंग के जो फुटेज हैं, उन्हें वह परेड मैदान में बड़े स्क्रीन लगवाकर लोगों को दिखाएं। सीएम रावत की यह चुनौती इस मामले में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इंदिरा ने सीएम के परिजनों व अफसरों के स्टिंग अपने पास होने की बात कही थी। हांलाकि इंदिरा हृदयेश ने विधानसभा सत्र के दौरान लोकायुक्त पर र्चचा के दौरान कहा था कि उनके पास कई ऐसे सुबूत हैं, जो लोकायुक्त को दिए जा सकते हैं। सदन से बाहर मीडिया से बात करते हुए इंदिरा ने यह भी कहा था कि उनके पास इनके परिवार के सदस्यों व अफसरों के स्टिंग के सुबूत हैं।
स्टिंग के खुलासे की चुनौती,भाजपा और कांग्रेस में घमासान
देहरादून। भाजपा और कांग्रेस के बीच स्टिंग कांड के सबूतों को सार्वजनिक करने की चनौती खड़ी हो गई है। एक ओर भाजपा सरकार पर हमला करते हुए कांग्रेस लोकायुक्त की नियुक्ति करने की मांग कर रही है तो वहीं भाजपा नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के स्टिंग के बसूत हासिल करने का दावा कर रही कांग्रेस नेत्री इंदिरा के बयान पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने चुनौती दे डाली है कि उनके पास स्टिंग हैं तो सार्वजनिक करें। भट्ट ने कहा कि इंदिरा वरिष्ठ विधायक ही नहीं महत्वपूर्ण पदों पर रही हैं। उनसे भ्रामक बयान की अपेक्षा नहीं की जाती।उनका कहना है कि डा. इंदिरा अपने बेटे की हार से बौखला गई हैं और अनर्गल बयानबाजी करने लगी है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने स्टिंग कांड के खुलासे के लिये भाजपा को घेरते हुए कहा कि पहले भाजपा सरकार लोकायुक्त की नियुक्ति तो करे तभी उन्हें सबूत दिखा देंगे। प्रीतम का कहना है कि चुनाव में जनता को भ्रमित कर भाजपा सत्ता में तो आ गई मगर अब अपने ही वायदों को पूरा करने में असफल साबित हो गई है। प्रीतम ने मुख्यमंत्री की चुनौती पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार में अगर हिम्मत है तो पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये मीडिया कर्मी से बरामद स्टिंग के वीडियो को परेड ग्राउंड में सार्वजनिक रूप से दिखा दे।

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