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मैं नहा धोकर तैयार बैठा हूं…!

देहरादून। तो क्या निकाय चुनाव में कांग्रेस भाजपा को वॉकओवर दे देना चाहती है? सियासी धुरंधर हरीश रावत की निकाय चुनाव में गैरमौजूदगी को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अभी अभी सोशल मीडिया पर उनके एक बयान को लेकर तो भाजपा और कांग्रेस के साथ ही पूरे प्रदेश के लोगों में खलबली सी मचा दी है। इस बयान में सबसे अहम तो यह सामने आया है कि निकाय चुनाव के घमासान में वह अब तक चुनाव प्रचार में शामिल नहीं हो पाये है जबकि उनकी गैरमौजूदगी को लेकर कई नेताओं ने यहां तक कहना शुरू कर दिया है कि मोदी लहर का असर हो रहा है और हरीश रावत ने भी भाजपा के लिये काम करना शुरू कर दिया है। तभी वह त्रिस्तरीय निकाय चुनाव में अब तक किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करने नहीं पहुंचे है। इधर अब तक हरीश रावत को चुनाव प्रचार में आमंत्रण नहीं मिलने से उनके समर्थक भी बेचैन हैं। हांलाकि उनका कहना है कि हरदा जल्द ही असम से लौट आयेंगे और पार्टी के लिये प्रचार भी करेंगे। बता दें कि सोशल मीडिया पर उनके एक बयान जिसमें लिखा गया है कि ‘मै नहा धोकर तैयार बैठा हूं–आमंत्रण का इंतजार है–’। निकाय चुनाव में चुनावी प्रचार के शोर में हरीश रावत पूरी तरह से नदारद है। गौर हो कि कांग्रेस सबसे कद्दावर नेता व वर्तमान में राष्ट्रीय नेतृत्व में केंद्रीय महासचिव बनने के बावजूद हरीश रावत प्रदेश में हो रहे निकाय चुनाव में दूर दूर तक कहीं भी नजर नहीं आ रहे है। पार्टी के नेता भले ही उनकी गैरमौजूदगी पर खामोशी से बैठे हों मगर धुर विरोधी भाजपा से मुकाबले के लिये कांग्रेस को हरीश रावत जैसे महारथी का साथ नहीं मिलना भाजपा को वॉकओवर देने जैसा प्रतीत हो रहा है। वैसे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष स्वयं निकाय चुनाव की कमान अपने हाथों में लिये हुए हैं जबकि प्रदेश प्रभारी को भी चुनाव प्रचार के लिये बुलाया गया है। वहीं नेता प्रतिपा डा- इंदिरा हृद्येश के पुत्र को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया गया है जिससे वह भी अपने क्षेत्र में कैद रह गई है। मगर अब तक कांग्रेस के अन्य बड़े नेताओं के चेहरे चुनाव प्रचार में नहीं दिख रहे है। पार्टी में अंदरखाने आखिर चल क्या रहा रहा है इसको लेकर भाजपा भी बेचैन है। इधार भाजपा ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को चुनाव प्रचार के लिये मैदान में उतार दिया है तो कांग्रेसी खेमे में अब भी खोमोशी है। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हरीश रावत के इस नये बयान को लेकर भी नये नये निहार्थ निकाले जाने लगे है। माना तो यहां तक जा रहा है कि आगामी लोकसभा के चुनाव में हरीश रावत चुनावी रणभूमि में कूदने के लिये बेताब तो है मगर आम चुनाव से पहले निकाय चुनाव के घमासान में उनकी खामोशी कहीं बड़ा तूफान आने का संकेत तो नहीं है। इस बयान को लेकर सियासी गलियारों में चर्चायें भी हैं कि कहीं हरदा का यह इंतजार भाजपा के आमंत्रण के लिये तो नहीं किया जा रहा है?
@ Narendra Baghari (Narda) 

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