February 11, 2026

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सरकार को चाहिये तो और देंगे बलिदान!आत्मबोधानंद और पुण्यानंद ने भोजन छोड़ा, तप शुरू

हरिद्वार। उत्तराखंड में गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिये 112 दिन तक अनशन करने के बाद अपना बलिदान देने वाले स्व- स्वामी सानंद की मांगों के समर्थन में आज दो और संतों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। देश के पीएम नरेंद्र मोदी को एक बार फिर कड़ी चुनौती देते हुए आत्मबोधानंद और पुण्यानंद ने मातृसदन में तप शुरू कर दिया। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद तप के तहत दौरान भूऽ हड़ताल करेंगे। इस दौरान वह जल के साथ नींबू, नमक और शहद लेंगे। वहीं, पुण्यानंद इस दौरान अन्न का भी त्याग करेंगे। वे इस दौरान केवल फल लेंगे। यदि इस दौरान आत्मबोधानंद को कुछ होता है तो पुण्यानंद फल का भी त्याग कर देंगे। बता दें कि गंगा रक्षा समेत कई मांगों को लेकर तप कर रहे सानंद की 112 दिन बाद मृत्यु हो गई थी। गंगा की अविरलता और निर्मलता के साथ ही गंगा को लेकर एक्ट बनाने की मांग को लेकर मातृसदन पिछले कई सालों से आंदोलन कर रहा है। गंगा से ऽनन की पूर्ण रूप से समाप्त करने की मांग को लेकर मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद के साथ ही आत्मबोधानंद कई बार तप कर चुके हैं। मातृसदन आश्रम में जैसे ही परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने पूर्व घोषणा के अनुसार आश्रम के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के बुधवार से तप में बैठने का एलान किया। इसी दौरान आश्रम के ही स्वामी पुण्यानंद ने भी बुधवार से अन्न छोड़ने का एलान कर दिया था। वहीं, आज सुबह दोनों ही संत तप पर बैठ गए। पत्रकारों से बातचीत में स्वामी पुण्यानंद ने कहा कि जब तक सानंद की मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक वह भी अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। स्वामी पुण्यानंद ने कहा कि यदि तप के दौरान आत्मबोधानंद को कुछ होता है तो वह फल भी छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को बलिदान चाहिए तो उन्हें बलिदान दिए जाएंगे। परमाध्यक्ष शिवानंद के समझाने पर भी पुण्यानंद के नहीं मानने पर उन्हें भी तप करने की अनुमति दे दी गई। वहीं स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि मातृसदन की ओर से सानंद की मांगों को पूरा करने के लिए शुरू किए जा रहे तप के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिऽा गया है। प्रधानमंत्री से मिलने का समय भी मांगा गया है।स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि एम्स ऋषिकेश से चंडीगढ़ पीजीआई में रेफर कर भर्ती कराए गए संत गोपाल दास को रविवार को वहां से डिस्चार्ज किया जा चुका है, लेकिन उन्हें वहां से लाने के लिए एम्स प्रशासन और देहरादून प्रशासन से कोई लेने को नहीं जा रहा है। जिससे प्रशासन और एम्स प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिसके चलते वह चंडीगढ़ पीजीआई में ही पड़े हुए हैं।

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