February 11, 2026

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ननकाना साहिब पहुँचे सीएम धामी : धर्म रक्षा का प्रतीक है गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान

काशीपुर(उद संवाददाता)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ननकना साहिब बड़ा गुरुद्वारा पहुँचे। मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा में मत्था टेका व प्रदेश के सुख समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इसके उपरांत उन्होंने गुरुद्वारा पहुँचकर मुख्यमंत्री ने गुरु तेग बहादुर जी के चरणों में शत.शत नमन करते हुए, गुरु तेग बहादुर जी के 350 वें शहीदी दिवस पर आयोजित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, अमृतसर द्वारा आसाम से अमृतसर तक नगर कीर्तन (पदयात्रा) में आये सभी संगत सदस्यों एवं उपस्थित महानुभावों का देवभूमि उत्तराखंड के समस्त नागरिकों की ओर से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि ये मेरा परम सौभाग्य है कि मुझे आज गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के पावन अवसर पर आयोजित शहीदी नगर कीर्तन यात्रा की संगत का हिस्सा बनने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि ये नगर कीर्तन यात्रा असम के श्री धोबड़ी साहिब से प्रारंभ होकर विभिन्न राज्यों से होते हुए श्री आनंदपुर साहिब पहुंचकर पूर्ण होगी जो कि लगभग 2500किमी की है। उन्होंने कहा कि ये केवल एक नगर कीर्तन यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, एकता और गुरु साहिब के संदेश जन.जन तक पहुंचाने का पवित्र अभियान है। श्री धामी ने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने उस संकटपूर्ण कालखंड में अपने प्राणों की आहुति दी, जब हमारे देश की संस्कृति, धर्म और आत्मसम्मान पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था। उन्होंने कहा कि मात्र 14 वर्ष की अल्पायु में ही गुरु तेग बहादुर जी ने अपने पिता के साथ मुगलों के खिलाफ युद्ध में अद्वितीय वीरता का परिचय दिया, उनकी वीरता से प्रभावित होकर उनके पिता ने ही उनका नाम ‘तेग बहादुर’ अर्थात ‘तलवार का धनी’ रखा था। उन्होंने कहा कि तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों पर हो रहे औरंगजेब के अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए कहा था कि मैं हिंदुओं का पीर हूँ किसी हिन्दू से पहले मुझे मुस्लिम धर्म कबूल करा कर दिखाए..। औरंगजेब ने षडयंत्रपूर्वक गुरु तेग बहादुर जी को दिल्ली बुलवाया और उन्हें बंदी बना लिया। फिर फरमान सुनाया या तो इस्लाम स्वीकार करो, या मृत्यु का वरण करो। जिस पर गुरु श्री तेग बहादुर जी ने कहा था.तिलक जंजू राखा प्रभ ताका..,कीनो बडो कलू महिं साका..,धरम हेत साका जिनि कीआ…सीसु दीआ परु सिररु न दीआ।



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