February 11, 2026

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छह माह में ही नगर निगम के ‘विकास के धर्रे उड़े’

प्रशासक के कार्यकाल में नगर निगम द्वारा बनवाई गई आरसीसी रोड की उखाड़ने लगी बजरी,पूर्व पार्षद के विकास के भी उतरे कपड़े
रुद्रपुर। ऐसा लगता है जैसे नगर निगम रुद्रपुर द्वारा वार्ड क्रमांक 25 में कराए जाने वाले विकास कार्यों की औसत आयु केवल और केवल छह महीना ही है। वह इसलिए, क्योंकि फाजलपुर महरौला में नगर निगम रुद्रपुर द्वारा कराए जाने वाले निर्माण कार्य बमुश्किल छह महीने ही अपने वास्तविक स्वरूप में रह पाते हैं। छह महीने बाद उनका स्वरूप बदलने लगता है और उनमें से भ्रष्टाचार बाहर झांकने लगता है । गौर तलब है कि वार्ड क्रमांक 25 नगर निगम के सबसे बड़े और उपेक्षित वार्डों में से एक है। वार्ड क्रमांक 25 अर्थात फाजलपुर महरौला में नगर निगम रुद्रपुर द्वारा आमतौर पर विकास कार्य कम ही कराए जाते हैं और जनता द्वारा भारी हाय तौबा किए जाने के बाद अगर कोई विकास कार्य कराया भी जाता है, तो उसकी औसत उम्र केवल छह महीने ही देखने को मिलती है ।फाजलपुर महरौला में हुए निर्माण कार्य चाहे पार्षद के समय के हो या फिर प्रशासक के कार्यकाल के, सबका हश्र करीब-करीब एक जैसा ही हुआ है। अब से कुछ महीने पहले जब नगर निगम रुद्रपुर नौकरशाही के नियंत्रण में था, तब निगम द्वारा रम्पुरा से प्रीत विहार को जोड़ने के लिए एक लिंक रोड का निर्माण कराया गया था ।इस लिंक रोड का कुछ हिस्सा हॉट मिक्स से निर्मित है और कुछ हिस्सा आरसीसी रोड के रूप में निर्मित किया गया है। मजे की बात तो यह है कि नगर निगम चुनाव के ऐन पहले आनन- फानन बनाई गई इस लिंक रोड के आरसीसी वाले भाग के पहली बरसात में ही धुर्रे उड़ने लगे हैं, जबकि आरसीसी रोड के बारे में यह कहा जाता है कि उस पर जितना अधिक पानी पड़ेगा वह उतनी ही मजबूत होगी ।लेकिन फाजलपुर महरौला में निर्मित उक्त आरसीसी रोड का चरित्र ऐन उलट देखने को मिल रहा है। जाहिर है कि उपरोक्त निर्माण कार्य की गुणवत्ता से अच्छा खासा समझौता किया गया है। कमोबेश ऐसा ही कुछ हाल पूर्व पार्षद के समय हुए निर्माण कार्यों का भी है। पिछली नगर निगम परिषद का कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व फाजलपुर महरौला में विराट मेडिकल स्टोर के सामने से शनि मंदिर और रोड और जूस फैक्ट्री रोड को जोड़ने वाली सड़क पर पूर्व पार्षद ने एक पुलिया का निर्माण कराया था ।उपरोक्त पुलिया तीसरे महीने से ही क्षतिग्रस्त होना आरंभ हो गई थी ।वर्तमान में उपरोक्त पुलिया के केवल अस्थि पंजर ही शेष रह गए हैं। साफ शब्दों में कहें तो पुलिया के ऊपर डाला गया सीमेंट कंक्रीट लापता है और मौके पर केवल पुलिया निर्माण के समय डाला गया जाल भर रह गया है। पुलिया निर्माण के पूर्व निगम द्वारा आसपास की कुछ सड़कों को हॉट मिक्स का कलेवर दिया गया था ,लेकिन अब यह सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी है ।हैरत की बात तो यह है कि इस गुणवत्ताहीन कार्य के लिए ना तो नगर निगम द्वारा संबंधित ठेकेदार से किसी प्रकार की जवाब तलबी ही की गई और ना ही किसी को उत्तरदाई ठहराया गया।

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