धराली क्षेत्र का दौरा करने रवाना हुए पूर्व सीएम हरदा : रास्ते अवरूद्ध होने से आपदा पीड़ितों से मुलाकात नहीं कर पाये
पुलिसकर्मियों, बीआरओ के लोगों व कर्मचारियों से बातचीत कर उनका हौंसला अफजाई की
देहरादून/उत्तरकाशी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत उत्तरकाशी जिले के आपदाग्रस्त धराली क्षेत्र का दौरा करने रवाना हुए। हांलाकि सड़क मार्ग पर जगह जगह भूस्खलन होने से रास्ते अवरूद्ध हो गये हैं जिससे पूर्व सीएम आपदा पीड़ितों से मुलाकात नहीं कर पाये। उन्होंने राज्य सरकार से बंद रास्तों को खोलने के लिए युद्ध स्तर पर काम करने की अपील की। मंगलवार को पूर्व सीएम ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि आज मैं जनपद उत्तरकाशी के धराली आपदा प्रभावित क्षेत्र में जाने के लिए उत्तरकाशी से निकला, लेकिन मौसम खराबी और मार्ग अवरूद्ध होने की वजह से भटवाड़ी भी नहीं पहुंच पाया, भटवाड़ी से पूर्व जहां भारी मलबा आया हुआ था, वहां से आगे जाने का कोई रास्ता नहीं था, इस दौरान वहां पुलिसकर्मियों, बीआरओ के लोगों व कर्मचारियों से बातचीत कर उनका हौंसला अफजाई की।उपला टकनौल क्षेत्र अर्थात धराली के आस-पास के आठ गांवों में 2 दिन से बिजली, टेलीफोन कनेक्शन नहीं है। गैस भी लोगों के पास नहीं है, क्योंकि अब खाना बनाने के लिए जो पहले लकड़ी के चूल्हे थे बहुत अतीत की बात हो गई है, खैर गैस मिल नहीं पा रही है, इन क्षेत्रों में राशन की भी कमी है और नजदीकी अस्पताल में जो अस्थाई बनाया गया है वहां आवश्यक दवाई व लोगों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। इस आपदा ने धराली ही नहीं बल्कि उसके आस-पास के एरियाज के लोगों को भी मानसिक आघात पहुंचाया है, उनको आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध करवाना आवश्यक है। मार्ग अभी भी बाधित है, आज मैंने धराली जाने का प्रयास किया था। जो स्थानीय सेब है विशेष तौर पर हर्षिल और उसके चारों तरफ की गांवों का वह अब तैयार हो गया है उसकी तुड़ाई प्रारंभ हो जानी चाहिए, उनके पास बॉक्सेज नहीं है और कहां वह भेजें, कैसे उसको बाजार में ले जाएं उसके लिए खुले रास्ते और सुरक्षित परिवहन उपलब्ध नहीं है। सरकार को चाहिए था कि एमएसपी घोषित कर देते और यह गारंटी दे देते वहां के सेब के बागान वालों को तो वह फिर अपनी तरीके से मार्केट खोजेंगे, मगर उनको इस बात की तसल्ली हो जाती कि अब हमारा सेब यूं ही नहीं सड़ जाएगा। बारिशें लगातार हो रही हैं, जिन लोगों के घर दबे हैं, आज मैं एक मृतक परिवार से मिला उनको अपने बेटे के मरने का गम तो है ही है, मगर साथ-साथ उनको इस बात का भी आघात है कि जितनी हमने संपत्ति खड़ी की थी, होटल बनाए थे, माउंटेनियरिंग इत्यादि के साज सामान की ट्रेनिंग के लिए एक कक्ष बनाया था, ट्रेनिंग करने की भी व्यवस्था की थी, वह सारी व्यवस्थाएं उनकी ध्वस्त हो गई, उनका बगीचा ध्वस्त हो गया और अब उनको वह कर्ज कैसे अदा करेंगे इसकी चिंता सता रही है! बेटे के जाने का गम और कर्ज कैसे अदा करेंगे? सरकार को चाहिए कि जितना सरकारी कर्ज है, चाहे राष्ट्रीयकृत बैंकों का हो, चाहे राज्य सरकार के किसी संस्था का हो उसको माफ कर देना चाहिए और उसकी अदायेगी राज्य सरकार को करनी चाहिए। वह भविष्य में अपने उद्यम खड़ा कर सकें उसकी मदद के लिए व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। लेकिन इस दिशा में अभी कोई पहल वहां नहीं हो रही है। मैंने जिलाधिकारी से बात की और दो-तीन बिंदुओं पर जिसमें सेब की निकासी आदि का बिंदु भी सम्मिलित है, राज्य के मुख्य सचिव महोदय से भी बात की और कृषकों को, आपदा ग्रस्त परिवारों को जो उनके व्यवसाय हैं उसके लिए )ण की सुविधा उपलब्ध करवाने और जो मलबे में दबे हुए लोग हैं, अधिकतम शवों को बाहर निकालने के लिए बड़ी मशीनों को भेजने की आवश्यकता पर उनसे बातचीत की। देखते हैं क्या परिणाम निकलता है? अब मैं सितंबर के महीने में फिर धराली जाऊंगा।


