‘लाल बाग’ के महाराजा ‘भगवान गजानन’ की हुई स्थापना : इस गणेश चतुर्थी पर प्रीति, सर्वार्थ सिद्धि एवं रवि के साथ इंद्र ब्रह्म योग के संयोग के साथ-साथ बन रहे हैं नव पंचम एवं शोभन राजयोग
रुद्रपुर। लाल बाग के महाराजा अर्थात बुद्धि- विवेक के दाता,सर्व मनोकामना पूर्णकर्ता,विघ्नहर्ता ,सिद्धीविनायक भगवान गणेश की उपासना का दस दिवसीय महापर्व आज से आरंभ हो रहा है। भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापना के साथ आज से आरंभ होने वाला गणेश उपासना पर्व अनंत चतुर्दशी अर्थात 6 सितंबर तक चलेगा। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को सर्वप्रथम पूजा जाने वाला देवता माना जाता है। भगवान गणेश को बुद्धि, सुख और विवेक का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर हुआ था। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना दोपहर के समय की जाती है और दस दिनों तक उनकी विधिवत पूजा की जाती है। भगवान गणेश की पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।यह उत्सव दस दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना से होती है। गणेश चतुर्थी को गणेश महोत्सव भी कहते हैं। विशेष रूप से इस पर्व को महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान गणेश महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में लालबाग के राजा के रूप में प्रतिष्ठित हैं। भगवान गणेश के लालबाग का महाराज कहलाए जाने के पीछे मनोकामना पूर्ति की एक बेहद दिलचस्प कथा है। हुआ कुछ यूं था कि सन 1932 में, मुंबई के लालबाग इलाके में पेरू चाल नाम का बाजार बंद हो गया, जिससे मछुआरे और विक्रेता अपनी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष करने लगे ।बाजार के लिए स्थायी जगह न मिल पाने के कारण उन्होंने गणपति बप्पा से मन्नत मांगी कि उन्हें एक स्थायी बाजार मिले। मान्यता है कि उनकी मन्नतें पूरी हुईं और उन्हें बाजार के लिए एक स्थायी भूखंड मिला। भगवान गणेश के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने के लिए, लोगों ने 12 सितंबर, 1934 को एक विशाल गणेश मूर्ति की स्थापना की, और इस तरह श्सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल, लालबाग की शुरुआत हुई ।कालांतर में यह मंडल और यहां स्थापित गणेश मूर्ति लालबाग के लोगों की सामूहिक इच्छाओं और मन्नतों को पूरा करने वाली बन गई।समय के साथ, इस मूर्ति की अपार लोकप्रियता और भक्तों की आस्था के कारण, यह श्लालबागचा राजाश् के नाम से प्रसिद्ध हो गई, जिसका अर्थ है लालबाग का राजा। वैदिक पंचांग के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म दोपहर के समय हुआ था। इसलिए इसी समय गजानन की स्थापना करना उत्तम माना जाता है। इस बार गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त 27 अगस्त को सुबह 11 बजकर 1 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 40 मिनट तक रहने वाला है। इसके बाद, दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 39 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 05 मिनट तक रहेगा। इस गणेश चतुर्थी पर प्रीति, सर्वार्थ सिद्धि एवं रवि के साथ इंद्र-ब्रह्म योग के संयोग के साथ ही नव पंचम एवं शोभन राजयोग भी बन रहा है। जिससे गणेश चतुर्थी का दिन और भी महत्वपूर्ण हो गया है। हिंदू धर्म पुरोहितों के अनुसार शुभ मुहूर्त में भगवान गजानन की स्थापना एवं भक्ति आराधना से भक्तगणों को गणपति की विशेष कृपा प्राप्त होती है । धर्माचार्य ने गणपति पूजन की जो साधारण विधि बताई है उसके अनुसार भक्त जनों को चाहिए कि वे गणेश चतुर्थी की पूजा शुरू करने के लिए सुबह स्नान करें और गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें। एक कलश में जल भरकर और उसे वस्त्र से ढककर गणेश जी को उस पर रखें। गणेश जी को सिंदूर, दूर्वा और घी अर्पित करें और 21 मोदक का भोग लगाकर पूजा करें। पूजा के बाद ल्यस्त्रुओं का प्रसाद गरीबों और ब्राह्मणों में दान जरूर करें। गणेश चतुर्थी के इस 10 दिन के उत्सव में भक्तजन गणेश जी की मूर्ति को अपने घर पर भी विधि विधान से स्थापित कर सकते हैं।
