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विपक्ष के शोर शराबे के बीच सख्त धर्मांतरण और अल्पसंख्यक शिक्ष विधेयक भी हुआ पारित

गैरसैंण(उद संवाददाता)। उत्तराखंड विधानसभा के ग्रीष्मकालीन सत्र में भारी हंगामे के बीच सरकार ने दो बड़े विधेयकों के साथ कुल नौ विधेयक पास करा लिये। सदन में जहां एक ओर धर्मांतरण कानून को और सख्त बनाने वाले संशोधन विधेयक को मंजूरी दी गई, वहीं दूसरी ओर मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित करने का रास्ता भी साफ हो गया। विधानसभा में विपक्ष कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार हंगामा कर रहा था, इसी बीच धर्मसम्य मंत्री सतपाल महाराज ने धर्मांतरण संशोधन विधेयक सदन के पटल पर रखा। सत्ता पक्ष ने बहुमत के आधार पर इसे पारित करवा लिया। इस विधेयक में धर्मांतरण को रोकने के लिए कई नए प्रावधान जोड़े गए हैं, जिनमें प्रलोभन की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है, डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण के प्रयासों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है, छप्र पहचान के प्रयोग और सार्वजनिक भावनाओं को आहत करने पर सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। कानून तोड़ने वालों के लिए न्यूनतम तीन वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि सामूहिक धर्मांतरण या नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति और दिव्यांग व्यक्तियों को निशाना बनाने के मामलों में कठोर दंड सुनिश्चित किए गए हैं। इसी सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड समाप्त करने और उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (यूसेम) गठित करने का विधेयक सदन में रखा, जिसे भी बहुमत से पारित कर दिया गया। इस नए कानून के तहत 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड और उससे संबंधित पुराने अधिनियम स्वतः निरस्त हो जाएंगे। अब राज्य में सभी अल्पसंख्यक समुदायों दृ सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन, मुस्लिम और पारसी दृ के शिक्षा संस्थानों को प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी। प्राधिकरण इन संस्थानों के पाठ्यक्रम, परीक्षाओं और प्रशासनिक व्यवस्था पर निगरानी रखेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि गैर-अल्पसंख्यक छात्रें की संख्या 15 प्रतिशत से अधिक न हो। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से न केवल अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी बल्कि उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम भी उठाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि अब तक केवल मुस्लिम समुदाय के धार्मिक शिक्षा संस्थानों को ही मान्यता देने की व्यवस्था थी, लेकिन नए कानून के तहत सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान अधिकार मिलेंगे। सत्र के दौरान अनुपूरक बजट समेत कई अन्य विधेयक भी पास कराए गए। विपक्ष लगातार नारेबाजी करता रहा, लेकिन बहुमत के बल पर सरकार ने अपने सभी प्रस्ताव सदन से पारित करा लिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार उत्तराखंड में धर्मांतरण के मामलों पर सख्ती से रोक लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। फ्प्रलोभन देकर, बहला-फुसलाकर या लव जिहाद के तहत धर्मांतरण करने वालों को अब किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी। अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक के जरिए सभी समुदायों को समान शिक्षा का अधिकार देने की पहल की गई है। मदरसा बोर्ड 2026 में समाप्त कर दिया जाएगा और इसके स्थान पर नया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण स्थापित होगा, जिससे सभी अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा होगी।

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