जनता के दिलों में आज भी कायम है ‘ठुकराल ब्रांड’
पंचायत चुनाव के सहारे ठुकराल की ‘फिर से एंट्री, जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में कामयाब दिखे ठुकराल
रुद्रपुर। सियासत के मैदान में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कुर्सी जाए तो भी मिटते नहीं बल्कि और निखरते हैं। रुद्रपुर के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल का नाम आज उन्हीं शख्सियतों में गिना जा रहा है। पंचायत चुनाव को मंच बनाकर उन्होंने न सिर्फ अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराया, बल्कि अपने विरोधियों को आईना भी दिखा दिया। राजनीति से किनारे किए जाने के बावजूद पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने पंचायत चुनाव के जरिए अपनी दमदार वापसी का बिगुल बजा दिया है। कभी भाजपा के कद्दावर चेहरे रहे ठुकराल इस बार संगठन से इतर जनता के भरोसे पर खरे उतरे और पंचायत चुनाव में अपनी रणनीति और पकड़ से यह जता दिया कि रुद्रपुर में राजनीति बिना ‘ठुकराल फैक्टर’ के अधूरी है। 2012 और 2017 में भाजपा के टिकट पर दो बार विधायक रहे श्री ठुकराल को 2022 में पार्टी ने किनारे कर दिया, लेकिन जनता ने नहीं। वे निर्दलीय चुनाव जरूर हारे, मगर मैदान नहीं छोड़ा। पंचायत चुनाव में आजाद उम्मीदवार की जीत के पीछे उनका नाम सबसे ज्यादा चर्चित रहा। यह वही क्षेत्र हैं जो रुद्रपुर विधानसभा के ग्रामीण इलाकों का हिस्सा हैं, जहां उनके समर्थन से भाजपा के आधिकारिक प्रत्याशी तक धराशायी हो गए। कुरैया,खानपुर पूर्व, खटोला और बरीराई जिला पंचायत क्षेत्र की कई ग्राम सभाएं सीधे-सीधे रूद्रपुर विधानसभा क्षेत्र को प्रभावित करती हैं। खानपुर पूर्व की 13 में से 10, कुरैया की 7, खटोला की 2 और नौ ग्राम सभाओं वाले बरी राई क्षेत्र का कुछ हिस्सा रूद्रपुर और कुछ हिस्सा गदरपुर विधानसभा में है । इन चारों जिला पंचायत क्षेत्रों में से खानपुर पूर्व में ठुकराल सक्रिय रूप से चुनाव प्रचार कर रहे थे तो अन्य तीन सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से निर्दलीय उम्मीदवारों को जिताने के लिए अपनी टीमों को लगाया हुआ था। खास बात यह रही कि खानपुर पूर्व जिला पंचायत सीट से सुषमा हालदार को जितवाने में उन्होंने जो भूमिका निभाई, उसने स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी। जनता के बीच पैठ रखने वाले इस पूर्व विधायक ने गांव-गांव जाकर न केवल प्रचार किया, बल्कि मुद्दों की नब्ज भी टटोली कृ जिससे यह साफ हो गया कि ठुकराल राजनीति छोड़ने नहीं, मजबूत वापसी के लिए मैदान तैयार करने में जुटे हैं।शहर से लेकर गांव तक, हर वर्ग के बीच लोकप्रियता का ग्राफ ऊपर चढ़ा है। जहां भाजपा के बड़े नेता क्षेत्र में नजर नहीं आए, वहीं ठुकराल ने पंचायत चुनाव को अपना ‘जनसंपर्क अभियान’ बना लिया। लोगों से सीधा संवाद, डोर-टू-डोर मुलाकात और पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से जोड़ने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। नतीजा यह रहा कि जनता ने उनका साथ भी खुलकर दिया अब सवाल है- क्या राजकुमार ठुकराल 2027 के लिए तैयारी में हैं? फिलहाल तो साफ है कि उनके कदम फिर से विधानसभा की ओर बढ़ रहे हैं। पंचायत चुनाव के नतीजों ने उन्हें सियासी तौर पर फिर से स्थापित कर दिया है। ठुकराल का अंदाज भी पुराना नहीं रहा, अब वह सीधे जनता के भरोसे राजनीति की नई इबारत लिखना चाहते हैं। पार्टी चाहे साथ हो या नहीं जनता का साथ, उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बन गया है।
