January 22, 2026

Uttaranchal Darpan

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नैनीताल(उद संवाददाता)उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पूर्व मेयर रामपाल सिंह को वर्ष 2019 में दर्ज एक आपराधिक मामले में बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया आरोपों में कोई आपराधिक आधार न पाते हुए संपूर्ण आपराधिक कार्यवाही को प्रारंभिक चरण में ही समाप्त कर दिया।यह मामला रुद्रपुर निवासी कांताप्रसाद गंगवार द्वारा दर्ज की गई एफआईआर संख्या 152/2019 से संबंधित था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि रामपाल सिंह ने ₹10 लाख की मांग की और भुगतान न करने पर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी।

माननीय उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 528 के अंतर्गत दायर याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 389 (डराकर वसूली) और 506 (आपराधिक धमकी) के आवश्यक तत्व शिकायत में दिखाई नहीं देते। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि शिकायतकर्ता द्वारा चार वर्षों की देरी से विरोध याचिका (प्रोटेस्ट पिटीशन) दायर किया जाना मामले की मंशा पर गंभीर संदेह खड़ा करता है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विपुल शर्मा ने न्यायालय में प्रस्तुत किया कि शिकायतकर्ता स्वयं एक अतिक्रमणकारी है, जिसे रामपाल सिंह ने अपने मेयर कार्यकाल में नगर निकाय की भूमि से हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। उसी के प्रतिशोध स्वरूप यह आपराधिक मामला दर्ज कराया गया। शिकायतकर्ता की ओर से पूर्व में दाखिल दीवानी वाद और रिट याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी थीं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत में न तो कोई धनराशि दिए जाने का उल्लेख है और न ही संपत्ति के किसी सौंपे जाने का संकेत है, जो वसूली के अपराध के लिए अनिवार्य होता है। साथ ही, धारा 506 के तहत आवश्यक भय, इरादा या हानि की संभावना का कोई स्पष्ट वर्णन भी शिकायत में नहीं था।

इन सभी तथ्यों के आलोक में, न्यायालय ने मजिस्ट्रेट द्वारा दिनांक 19.06.2024 को पारित संज्ञान आदेश को निरस्त करते हुए एफआईआर और उससे उत्पन्न मि.अ.क्र.सं. 64/2020 को प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त कर दिया

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