सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश : कांवड़ मार्ग पर होटलों को दिखाना होगा लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन
नई दिल्ली(उद ब्यूरो)। कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थापित भोजनालयों और दुकानों में क्यूआर कोड अनिवार्य करने के उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति एम-एम- सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन- कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं की अंतरिम राहत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि क्यूआर कोड अनिवार्यता के मुद्दे पर विचार मुख्य याचिका की सुनवाई के दौरान किया जाएगा। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह निर्देश अवश्य दिया कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित सभी होटल और भोजनालय संचालक अपने लाइसेंस व पंजीकरण प्रमाण-पत्र सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना सुनिश्चित करें। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी कर कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित सभी खाने-पीने की दुकानों, भोजनालयों और रेस्टोरेंटों को क्यूआर कोड स्टीकर प्रदर्शित करने और दुकानदार के नाम व पहचान संबंधित विवरण बैनर के माध्यम से सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था। इस आदेश के विरुद्ध शिक्षाविद अपूर्वानंद, एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्र सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए कहा कि दुकानदारों की पहचान उजागर करना भेदभावपूर्ण है, जिससे धार्मिक आधार पर लक्षित हिंसा या बहिष्कार की संभावना बढ़ सकती है। उनके अनुसार, यह आदेश कांवड़ यात्रा के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के दुकानदारों के विरुद्ध भीड़ हिंसा को प्रोत्साहित कर सकता है। याचिकाकर्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यह कदम यात्रियों को संकेत देता है कि किन दुकानों से परहेज किया जाए, जो सामाजिक सौहार्द्र के लिए घातक हो सकता है। साथ ही, उन्होंने सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न होने की आशंका जताते हुए इस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की थी। इस मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड सरकार से जवाब दािखल करने को कहा है। याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों पर विचार करते हुए पीठ ने स्पष्ट किया कि मुख्य याचिका की विस्तृत सुनवाई के दौरान सभी पहलुओं पर गौर किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी प्रकार के एक आदेश को लेकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों को अंतरिम रूप से रोक लगाने के निर्देश दिए थे। वर्तमान मामले में अदालत ने क्यूआर कोड अनिवार्यता पर तत्काल कोई आदेश देने से परहेज करते हुए कहा है कि इस विषय पर पूर्ण सुनवाई के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
