February 11, 2026

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कुमाऊं में बढ़ा ‘महिलाओं पर अत्याचार’ : चारों पहाड़ी जनपदों में बढ़ा महिलाओं के विरुद्ध अपराध का आंकड़ा

हल्द्वानी(उद ब्यूरो)। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा आए दिन नए-नए कानून बनाते रहने एवं महिलाओं के विरुद्ध अपराध रोकने के लिए तमाम जागरूकता अभियान चलाने तथा मातृशक्ति का उत्पीड़न करने वाले अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही किए जाने के बावजूद उत्तराखंड में महिलाओं के विरुद्ध अपराध की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। ताजा हालात यह हैं कि देवभूमि में मातृशक्ति पर अत्याचार का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। उत्तराखंड में अमूमन यह देखा गया है कि पहाड़ी अंचलों में महिलाओं को अच्छा खासा सम्मान दिया जाता है और मैदानी क्षेत्र की तुलना में वहां महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामले भी कम सामने आते हैं, लेकिन कुमाऊं मंडल के ताजा आपराधिक आंकड़ों ने इस मिथक को अब तोड़ दिया है ।ताजा आंकड़ों के अनुसार  इस साल नैनीताल जनपद में महिला अपराध की घटनाओं में कमी आई है ,तो वहीं कुमाऊं मंडल के चार पहाड़ी जनपद में महिला अपराध का ग्राफ बढ़ा है। पुलिस महकमे के आंकड़ों के अनुसार कुमाऊं मंडल में अलग-अलग थाना कोतवाली में दर्ज इस साल जनवरी से लेकर नवंबर माह के अंत तक दुष्कर्म, हत्या, अपहरण, शीलभंग, दहेज प्रताड़ना, यौन अपराध और मुस्लिम महिला विवाह अधिकार अधिनियम के 1448 मामले सामने आए हैं। जबकि पिछले वर्ष कुमाऊं के छह जिलों नैनीताल, उधम सिंह नगर, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के 1607 मामले दर्ज किए गए थे । आंकड़ों के अनुसार नैनीताल जिले में इस वर्ष महिलाओं के विरुद्ध अपराध बेशक कम हुए हैं ,लेकिन बड़ी चिंता का विषय तो यह है कि कुमाऊं के चारों पहाड़ी जिलों में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष महिलाओं पर अत्याचार बढ़ा है। पिछले साल जहां नैनीताल में 490, उधम सिंह नगर नगर में 866, अल्मोड़ा में 84, बागेश्वर में 20, पिथौरागढ़ 90 और चंपावत में 57 महिलाओं से संबंधित अपराध दर्ज हुए थे वहीं इस साल  नवंबर माह की समाप्ति तक नैनीताल में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के 302, उधम सिंह नगर में 865, अल्मोड़ा में 87, बागेश्वर में 25, पिथौरागढ़ में 107 और चंपावत में 64 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पिछले वर्ष की तुलना में महिलाओं के विरुद्ध अपराध में वृद्धि को लेकर पुलिस महकमे के अपने ही तर्क हैं ।डीआईजी कुमाऊं डॉ योगेंद्र सिंह रावत के अनुसार कुमाऊं मंडल के कुछ जिलों में इस वर्ष महिलाओं के विरुद्ध घटित होने वाले अपराधों में कुछ जिलों में कमी आई है, मगर कुछ जिलों में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के आंकड़ों में मामूली वृद्धि हुई है। इसकी एक प्रमुख वजह यह है कि कानून की सुरक्षा का कवच मिलने के कारण महिलाएं अपनी समस्याएं लेकर पहले की अपेक्षा अधिक सामने आ रही हैं। पुलिस द्वारा महिलाओं के विरुद्ध अपराध में लगातार कठोर कार्यवाही अमल में लाई जा रही है। जिसका नतीजा है कि महिलाओं में जागरूकता आई है और अपने साथ होने वाले अपराध को लेकर महिलाएं लगातार सामने आ रही हैं। पुलिस द्वारा न्यायालय में ठोस पैरवी कर दोषियों को सजा भी दिलाई जा रही है।

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