February 25, 2026

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पूर्व सीएम हरीश रावत ने की फिल्म ‘पायर’ की जमकर तारीफः विनोद कापड़ी ने जीवंत उत्तराखंडियत को दुनिया का साक्षात्कार कराया है

देहरादून(उद संवाददाता)। उत्तराखंड की फिल्म ‘पायर’ को प्रदेश के साथ-साथ विदेश में भी प्यार मिल रहा है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता और निर्देशक विनोद कापड़ी की फिल्म पायर को ‘तेलिन ब्लैक नाइट्स फिल्म फेस्टिवल’ में प्रदर्शित किया गया। फिल्म ‘पायर’ सच्ची कहानी पर आधारित है। साल 2017 में विनोद को मुनस्यारी के एक गांव में बुजुर्ग जोड़ा मिला था। उसी जोड़े के की कहानी फिल्म में दर्शाई गई है। इस फिल्म में 80 साल के बुजुर्ग जोड़े की एक बेहद ही अनोखी और दिल दहला देने वाली प्रेम कहानी को दिखाया गया है। बता दें कि इस फिल्म में बुजुर्गों पदम सिंह और हीरा देवी मुख्य रोल में है। दिलचस्प बात ये है कि इन दोनों में से किसी ने भी पहले ना कभी कैमरा फेस किया और ना ही कभी फिल्म देखी। पदम सिंह सेवानिवृत्त भारतीय सेना के जवान हैं। अब वो खेती करते है। तो वहीं हीरा देवी भैंसों की देखभाल और लकड़िया और घास जंगलों से लाती है। उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने निर्माता निर्देशक विनोद कापड़ी की जमकर सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर क पोस्ट साझा कर कहा कि वाह भई विनोद कापड़ी जी आपने उत्तराखंडियत को एक नई बुलंदी प्रदान की है। हम सब भगवान केदारनाथ के सम्मुख हाथ जोड़कर खड़े हैं कि आपकी फिल्म पायर अर्थात चिता जो एस्टोनिया की राजधानी ताल्लिन में हो रहे फिल्म फेस्टिवल में भारत की एकमात्रा फिल्म है, वह पुरूस्कृत हो। आपने मेरे गढ़ की 60 वर्षीय हीरा देवी और पुराने थल के 80 वर्षीय पदम सिंह को हीरोइन और हीरो के रूप में हमारी उत्तराखंडी गांवों की जो धीरे-धीरे भूतहा गांवों में परिणित हो रहे हैं उसकी वास्तविकता और उसकी जिंदा दिली, दोनों से दुनिया का साक्षात्कार कराया। आपकी हीरा देवी में हम जैसे लाखों लोगों की मां, बड़ी बहन और पदम सिंह जी में पिता और चाचा के दर्शन होते हैं। जब एस्टोनिया में भी हीरा देवी जी को घर में अपने भैंस को घास की पत्तियां देने की चिंता उठेगी तो हमारा उत्तराखंड जीवांत रूप में यूरोप की यह सुंदर शहर ताल्लिन में साक्षात हो उठे। मैं, आपकी कल्पनाशीलता और वास्तविकता का संगम करने की अद्भुत क्षमता को सेल्यूट करता हूं। विनोद भाई हमारे बहुत सारे हैं, लेकिन हमारे लोगों में से आप जैसे कुछ ही लोग हैं जो अब भी अपने गांवों को अंगीकार किए हुए हैं। आपने कनालीछीना की धार पर स्थित अपनी गांव की यादों को अभी भी संजोह करके रखा हुआ है, आपका बहुत-बहुत आभार और ढेर सारी शुभकामनाएं।

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