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पीएम मोदी ने दिल्ली में मनायी गढ़वाली इगास बग्वालः प्राचीन संस्कृति और पर्व को संरक्षित करने की मुहिम सराहनीय

नई दिल्ली(उद संवाददााता)। राज्यसभा सदस्य और भाजपा के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बलूनी के 20, गुरुद्वारा रकाबगंज रोड स्थित आवास पर सोमवार को इगास (बूढ़ी दिवाली) पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर पीएम नरेंद्र मोदी ने योगगुरु बाबा रामदेव और परमार्थ निकेतन के प्रमुख स्वामी चिदानंद सरस्वती के साथ गौ पूजा के साथ पवित्र अग्नि प्रज्वलित की। इस दौरान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नडडा, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल समेत कई दिग्गज हस्तियां मौजूद थी। पीएम मोदी ने इगास-बग्वाल कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें भी एक्स पर पोस्ट की हैं। प्रधानमंत्री ने प्राचीन संस्कृति और पर्व को संरक्षित करने की बलूनी की मुहिम और प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर बलूनी ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री की प्रेरणा से करीब-करीब भुला दिए गए इस पर्व को पुनर्जीवित करने की पहल की। करीब पांच सालों के प्रयासों के बाद अब यह पर्व न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि देश और दुनिया में मनाया जा रहा है। बलूनी ने इगास के अवसर पर राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने के राज्य सरकार के फैसले का भी स्वागत किया। बलूनी ने बताया कि इस पर्व के संदर्भ में कई मान्यताएं प्रचलित हैं। सबसे अहम मान्यता यह है कि लंका विजय के बाद जब भगवान राम अयोध्या पहुंचे तो लोगों ने घी के दीये जला कर उनका स्वागत किया। उनके आगमन की सूचना गढ़वाल क्षेत्र में कार्तिक शुक्ल एकादशी को मिली थी। इस सूचना से प्रसन्ना क्षेत्र के लोगों ने इसी दिन दीपावली मनाई थी, जिसे इगास या बूढ़ी दिवाली का नाम दिया गया। दूसरी मान्यता यह है कि गढ़वाल के माधो सिंह भंडारी के नेतृत्व में तिब्बत का युद्ध जीतने के बाद उनकी सेना दिवाली के 11 दिन बाद गढ़वाल पहुंची थी। पीएम मोदी ने इगास-बग्वाल कार्यक्रम की कुछ फोटो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट की हैं। पीएम मोदी ने एक्स पर फोटो शेयर करते हुए लिखा, उत्तराखंड के मेरे परिवारजनों सहित सभी देशवासियों को इगास पर्व की बहुत-बहुत बधाई! दिल्ली में आज मुझे भी उत्तराखंड से लोकसभा सांसद अनिल बलूनी जी के यहां इस त्योहार में शामिल होने का सौभाग्य मिला। मेरी कामना है कि यह पर्व हर किसी के जीवन में सुख- समृद्धि और खुशहाली लाए। पीएम ने आगे लिखा, हम विकास और विरासत को एक साथ लेकर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुझे इस बात का संतोष है कि लगभग लुप्तप्राय हो चुका लोक संस्कृति से जुड़ा इगास पर्व, एक बार फिर से उत्तराखंड के मेरे परिवारजनों की आस्था का केंद्र बन रहा है। उन्होंने आगे लिखा, उत्तराखंड के मेरे भाई-बहनों ने इगास की परंपरा को जिस प्रकार जीवंत किया है, वो बहुत उत्साहित करने वाला है। देशभर में इस पावन पर्व को जिस बड़े पैमाने पर मनाया जा रहा है, वो इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। मुझे विश्वास है कि देवभूमि की यह विरासत और फलेगी-फूलेगी।

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