February 26, 2026

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उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी : सीएम ने कहा राज्य में आपदा, वनाग्नि, पलायन और फ्लोटिंग जनसंख्या बड़ी चुनौती है

सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए बनाई जाए विशेष नीति
देहरादून। नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी आज उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे। सीएम ने उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री और नीति आयोग के उपाध्यक्ष के बीच बैठक में सीएम ने कहा कि उत्तराखण्ड विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला राज्य है। राज्य में पर्वतीय, मैदानी, भाबर और तराई क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में आपदा, वनाग्नि, पलायन और फ्लोटिंग जनसंख्या बड़ी चुनौती है। सचिवालय, देहरादून में नीति आयोग की बैठक में माननीय उपाध्यक्ष श्री सुमन बेरी जी एवं अन्य सम्मानित सदस्यों के साथ प्रदेश के विकास से सम्बंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। नीति आयोग के अधिकारियों से प्रदेश में बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटकों व श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए नीतियों का निर्माण करने का आग्रह किया। हमारा प्रदेश तेजी से देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है, इसी वर्ष SDG इंडेक्स में उत्तराखण्ड को नंबर वन स्थान मिला है लेकिन अभी भी कई सेक्टर में हमें और बेहतर कार्य करने की आवश्यकता है। हम ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में प्रभावी भागीदारी हेतु इकोलॉजी और इकोनॉमी का समन्वय बिठाते हुए ऊर्जा, विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी एवं औद्योगीकरण पर विशेष फोकस करते हुए कार्य कर रहे हैं। हमारी सरकार पलायन, वनाग्नि व आपदा प्रबंधन और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केंद्रित करते हुए नीतियों और योजनाओं पर काम कर रही है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में हमारी डबल इंजन सरकार ‘विकसित उत्तराखण्ड’ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है। सीएम धामी ने बैठक में कहा कि दो देशों की अन्तरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे होने के कारण उत्तराखण्ड सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। उन्होंने नीति आयोग के उपाध्यक्ष से अनुरोध किया कि हिमालयी राज्यों की भौगोलिक परिस्थियों को ध्यान में रखते हुए नीतियों का निर्धारण किया जाए। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों की आजीविका में वृद्धि के लिए विशेष नीति बनाने का अनुरोध भी किया। इससे पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन जैसी बड़ी समस्या का समाधान होगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिम आधारित नदियों को वर्षा आधारित नदियों से जोड़े जाने की एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर कार्य कर रही है. इसके दीर्घकालिक परिणाम गेम चेंजर साबित होंगे। “नदी-जोड़ो परियोजना“ के क्रियान्वयन के लिए अत्यधिक धनराशि की आवश्यकता है जिसके लिए उन्होंने इसके नीति आयोग से तकनीकी सहयोग के लिए अनुरोध किया।सीएम ने कहा कि उत्तराखण्ड की जनसख्या मूल रूप से लगभग सवा करोड़ है। लेकिन धार्मिक और पर्यटन प्रदेश होने की वजह से राज्य में इससे 10 गुना लोगों की आवाजाही है। राज्य में फ्लोटिंग जनंसख्या को ध्यान में रखते हुए आधारभूत और बुनियादी सुविधाओं के विकास की आवश्यकता होती है। उन्होंने नीति आयोग के उपाध्यक्ष से अनुरोध किया राज्य में फ्लोटिंग आबादी को ध्यान में रखते हुए राज्य के लिए नीति बने।मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड आपदा की दृष्टि से बहुत संवेदनशील राज्य है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण राज्य को प्रत्येक साल जन-धन की काफी क्षति होती है। राज्य में विकसित किया गया इन्फ्रास्टक्चर प्राकृतिक आपदाओं के कारण काफी प्रभावित होता है। उन्होंने अनुरोध किया कि राज्य की प्राकृतिक आपदाओं को ध्यान में रखते हुए नीति बनाई जाए। उन्होंने कहा कि वनाग्नि भी राज्य की बड़ी समस्या है। राज्य में वनाग्नि की चुनौतियों से समाधान के लिए राज्य को पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता होगी। राज्य के सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए भी विशेष नीति बनाने का अनुरोध भी मुख्यमंत्री ने किया।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने सीएम धामी को दी बधाई
नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्यों की रैंकिंग में उत्तराखण्ड को प्रथम स्थान मिलने पर मुख्यमंत्री को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज बैठक में राज्य की प्रमुख चुनौतियों से संबंधित जिन विषयों पर चर्चा हुई है, इन सभी विषयों पर हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के आकांक्षी जनपदों और विकासखण्डों के विकास के लिए भी नीति आयोग द्वारा हर संभव सहयोग दिया जाएगा।

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