February 27, 2026

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उपचुनाव में हुए रोमांचक मुकाबले में लखपत सिंह बुटोला से मात खा गए भंडारी : कांग्रेस प्रत्याशी काज़ी ने 449 वोटों से बाजी मारकर भड़ाना को हराया

देहरादून। उत्तराखंड में हुए उपचुनाव में रोमांचक मुकाबले में कांग्रेस ने दोनो सीट पर जीत की बाजी मारी है। बदरीनाथ विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस ने अपना कब्जा कर लिया है. कांग्रेस प्रत्याशी लखपत सिंह बुटोला ने भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र सिंह भंडारी को 5224 वोटों से पछाड़ा है. उपचुनाव में हुई जीत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है.मंगलौर सीट पर 10 जुलाई को हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने बाजी मारकर भाजपा को 449 वोटों से पछाड़ दिया है। जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। बता दें उत्तराखंड में दो विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला आज होना था। 10 जुलाई को बदरीनाथ और मंगलौर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हुए थे. मंगलौर विधानसभा सीट के पारिणाम सामने आ चुके हैं। जिसमें काज़ी मोहम्मद निजामुद्दीन ने 31727 वोट हासिल किए हैं. वहीं भाजपा प्रत्याशी करतार सिंह भड़ाना ने 31305 वोट हासिल किए हैं। बसपा के उबैदुर रहमान को 19559 वोट मिले हैं. कांग्रेस की जीत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता जश्न में डूब गए हैं उत्तराखंड में हुए उपचुनाव में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। दोनों सीटें पार्टी के हाथ से निकल गई। मंगलौर सीट पर फिर भी भाजपा का कभी कब्जा नहीं रहा, लेकिन बदरीनाथ सीट कई मायनों में खास थी। चुनाव प्रचार में भी पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भाजपा को बदरीनाथ सीट से हाथ धोना पड़ा। बदरीनाथ और मंगलौर का चुनावी समर भाजपा के विजय रथ की कड़ी परीक्षा था, जिसमें भाजपा सफल नहीं हो पाई। मंगलौर सीट पर भाजपा ने करतार सिंह भड़ाना को मैदान में उतारा था, लेकिन भड़ाना कांग्रेस प्रत्याशी काजी मोहम्मद निजामुद्दीन से मात खा गए। वहीं बदरीनाथ में भाजपा ने राजेंद्र भंडारी पर भरोसा जताया था, लेकिन कांग्रेस के लखपत सिंह बुटोला से भंडारी मात खा गए। वहीं भंडारी के भाजपा में आने से बदरीनाथ के भाजपा नेता और कार्यकर्ता खुश नहीं थे। उन्होंने खुले तौर पर तो इसका विरोध नहीं किया, लेकिन नतीजे संकेत दे रहे हैं। बदरीनाथ और मंगलौर सीट पर भाजपा की हार ने कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम किया है। लोकसभा चुनाव से पहले गढ़वाल मंडल की यही एकमात्र सीट थी, जो कांग्रेस के पास थी। लेकिन, कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भंडारी भाजपा में शामिल हो गए। यह सब इतने नाटकीय तरीके से हुए की जो भंडारी 24 घंटे पहले जिन कपड़ों में भाजपा के विरोध में आक्रामक प्रचार कर रहे थे, वही भंडारी उन्हीं कपड़ों में दिल्ली में भाजपा को सदस्यता ले लेते हैं। मजेदार बात यह है कि भाजपा संगठन को इसकी हवा भी नहीं लगती है। मंगलौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस को जातीय समीकरणों का फायदा मिला। मंगलौर सीट एक ऐसी सीट है जो भाजपा कभी नहीं जीत पाई है। अल्पसंख्यक बहुल यह सीट एक बार हाजी तो एक बार काजी के पास रही है। हालांकि भाजपा ने करतार सिंह भड़ाना को टिकट देकर कुछ हद तक गुर्जर वोट को अपने पक्ष में किया। अल्पसंख्यक वोट बसपा ओर कांग्रेस में बंटा जरूर, लेकिन इस बार काजी ने यह सीट जीत ली।






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