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पहले पांचो प्रयागों के दर्शन करते थे लोग…उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को चौबिसों घंटे संचालित करने से पड़ेंगे दुष्प्रभाव !

पूर्व सीएम हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किये महत्वपूर्ण सुझाव
देहरादून(उद ब्यूरो)। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक पोस्ट में कुछ महत्वपूर्ण सुझाव साझा किये है। पूर्व सीएम ने चारधाम यात्रा के संचालन और कारोबारियों की आजीविका के साथ ही तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य खराब होने से मौतो को भी अव्यवस्था का कारण माना है। शुक्रवार को फेसबुक पोस्ट में वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व सीएम हरदा ने बताया कि मैं, लखपत बुटोला जी जो विधानसभा बद्रीनाथ उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी हैं उनके नामांकन में भाग लेने के लिए गोपेश्वर की तरफ कल दिन में चला, मेरे साथ आनंद रावत भी हैं, हमने उत्सुकता वश होटलियर्स, ढाबे और जो होम स्टे हैं उन लोगों से पूछा कि आपको तो निरंतर फुल बुकिंग मिल रही होगी? तो उनमें से अधिकांश लोगों ने इनकार में सर हिलाया और जब कारण पता किया तो पता यह चला कि चार धाम यात्रा को चौबिसों घंटे संचालित करने का परिणाम यह है कि लोग सीधे आ रहे हैं, दो-दो ड्राइवर ला रहे हैं, एक थक जा रहा है तो दूसरे को इंगेज कर रहे हैं, इसलिए लोग आ रहे हैं दर्शन कर वापस चले जा रहे हैं। मैंने कुछ लोगों से पूछा कि जो यह एक्सीडेंट हो रहे हैं इनका कारण क्या है? तो उन्होंने कहा साहब कुछ भी हो ड्राइवर थक जाते हैं, पहले लोग जिस यात्रा को चार-पांच दिन में पूरी करते थे, अब वह यात्रा 24 घंटे के अंदर पूरी हो रही है तो उसके कुछ न कुछ दुष्प्रभाव तो पढ़ेंगे ही पड़ेंगे, यह एक्सीडेंट का एक कारण ड्राइवर की थकान है, वह भी यात्रा के 24 घंटे खुले रहने के साथ जुड़े हुए हैं, चार धाम यात्रा को बहुत तनावपूर्ण बना दिया है। यात्रा आरामदायक हो ताकि लोग भक्ति भाव के साथ आए और भक्ति भाव के साथ यात्रा करें यह वातावरण हमको देना चाहिए। पहले लोग हरिद्वार में हर की पैड़ी के दर्शन करते थे, त्रिवेणी घाट के दर्शन करते थे, पांचो प्रयागों के दर्शन करते थे, आज ऐसा लगता है जैसे एक्सप्रेस हाईवे में चलने वाला पैसेंजर हो तीर्थ यात्री न हो!! तीर्थ यात्रा का स्वरूप 24 घंटे की यात्रा से बहुत बदल जाएगा, पहले ही हवाई यात्रा से बदल चुका है। मैं समझता हूं यात्रा को सुरक्षा की दृष्टिकोण से रात को संचालन रोका जाना चाहिए, 8 बजे बाद 10 बजे बाद कोई समय निर्धारित किया जाना चाहिए और आप सुबह तीन-चार बजे से यात्रा को प्रारंभ कर दीजिए, चाहे कुछ घंटे ही सही यात्रा को विश्राम दीजिए, इससे यात्री को बद्रीनाथ-केदारनाथ या चारधाम के वातावरण के अनुरूप ढलने में भी मदद करेगी, जो यह हार्ट अटैक से मौतें हो रही हैं यात्रा के दौरान उसका एक कारण यह भी है कि यात्री सीधे आ रहा है और सीधे धाम में पहुंच रहा है, एक ठंडा भिन्न वातावरण उसको मिल रहा है, वह उसकी आकस्मिक मौत का कारण बन रहा है और यात्रा के प्रबंधन में लगे हुए जो लोग हैं उनको भी विश्राम दीजिए, वाहनों को भी विश्राम दीजिए और साथ ही साथ होटल वालों को भी विश्राम दीजिए और उनकी आजीविका इस यात्रा के साथ जुड़ी है उनके साथ न्याय करिये।

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