रुझानों में “दीदी” को झटका : पश्चिम बंगाल में मोदी का मैजिक, पहली बार बीजेपी सरकार !
असम में भाजपा, तमिलनाडु में डीएमके, केरल में यूडीएफ गठबंधन जीत के करीब
नई दिल्ली। देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है। रुझानों में बंगाल में भाजपा ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रही है। केरल में यूडीएफ गठबंधन जीत के करीब है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरलम और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 की वोटों की गिनती जारी है। रुझानों में बंगाल में बीजेपी पहली बार सरकार बनाती दिख रही है। वह 193 सीटों पर आगे चल रही है और तीन सीटें जीत चुकी है। वहीं, टीएमसी को झटका लगा है और उसने 100 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाया और डबल डिजिट में सिमटती दिख रही है। असम विधानसभा चुनाव 2026 के रुझानों में भाजपा बड़े बहुमत के साथ फिर राज्य में सरकार बना रही है। भाजपा मुख्यालय में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। असम में भाजपा, तमिलनाडु में डीएमके, केरल में कांग्रेस आगे चल रही हैं। पश्चिम बंगाल में 293 सीटों के लिए काउंटिंग हो रही है। वहीं असम की 126 सीटों पर एकतरफा मामला देखने को मिल रहा है और यहां भाजपा 99 सीटों पर आगे चल रही है। तमिलनाडु में एक्टर विजय की पार्टी टीवीके जबरदस्त प्रदर्शन करती नजर आ रही है। उसने सत्ताधारी डीएमके को पछाड़ते हुए 106 सीटों पर बढ़ बनाई हुई है, जबकि डीएमके 71 सीटों पर आगे चल रही है। केरलम की 140 सीटों पर वोटों की गिनती हो रही है और कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ 100 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं लेफ्ट 35 सीटों के साथ पीछे चल रही है।पुडुचेरी की 30 सीटों पर मतगणना हो रही है और यहां बीजेपी 18 और कांग्रेस 7 सीटों पर आगे चल रही है।
पश्चिम बंगाल के चुनाव में इस बार दीदी का नहीं मोदी का मैजिक चला। वहीं पिछले चुनावों में बुरी तरह पराजित होने वाली भाजपा ने इस चुनाव में टीएमसी को सत्ता से बाहर कर दिया। हांलाकि दीदी की सरकार को हटाने के लिए बीजेपी ने शाम दाम दंड और भेद की रणनीति अपनायी और हिंदू वोटबैंक को साधने के लिए पूरा जोर लगाकर चुनावी मैदार में उतरी। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों की चुनावी रैलियों में टीएमसी के कार्यकर्ताओं को कड़ी चुनौती देते हुए बीजेपी ने जीत की बाजी मार ली है। चुनावी विष्लेशकों का मानना है कि भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव में मैदान में उतरकर खुद मोर्चा संभाला। 15 दिन उन्होंने बंगाल में डेरा डाले रखा। यह शाह की वह रणनीति थी जिसका असर अब नतीजों में दिख रहा है।
