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मौत से पहले भाभी को आखिर क्या बताना चाहते थे रोहित शेखर!

नई दिल्ली/देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी की संदिग्ध परिस्थित में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कहा जा रहा है कि रोहित ने सुबह 4 बजे अपनी भाभी कुमकुम को फोन किया था। लेकिन कुमकुम उनका फोन नहीं उठा पाई। आिखर वो क्या बात थी जो रोहित भाभी को बताना चाहते थे। वहीं, सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि रोहित ने सुबह फोन किया तो क्या उनके घर वालों ने दोबारा पलट कर रोहित को फोन क्यों नहीं किया। इसके अलावा रोहित की लाश घर के जिस कमरे में बरामद हुई वह भी सवालों के घेरे में है। क्योंकि जिस कमरे में रोहित सोते हैं उसे छोड़कर वह दूसरे कमरे में सोए थे। हालांकि, उनके परिवार वालों का कहना है कि पत्नी को दिक्कत ना हो इसके लिए वो दूसरे कमरे में सोए हुए थे। बताया जा रहा है कि दिल्ली स्थित डिफेंस कॉलोनी के आवास में देर रात रोहित घर जरूर पहुंचे थे, लेकिन दोपहर तक उनके घर वाले उनके कमरे तक में नहीं गए। दोपहर बाद जब रोहित कमरे से बाहर नहीं आए तो उनके केयरटेकर गोलू कमरे में गए। गोलू ने देखा कि रोहित शेखर के मुंह से खून आ रहा था। इसके बाद गोलूू ने फोन कर परिजनों को सूचना दी और मैक्स अस्पताल ले जाया गया। जहां रोहित को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। गौर हो कि कांग्रेस के अलावा भाजपा तक से संपर्क साधकर रोहित ने उत्तराखंड में अपनी सियासी संभावनाएं तलाशी, पर किस्मत हर बार दगा दे गई। उत्तराखंड व यूपी की राजनीति में एनडी तिवारी एक ऐसा नाम था, जिसका सहारा लेकर कइयों ने बुलंदियों को छुआ। ऐसे में किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन उनके लिए अपने पुत्र को राजनैतिक सफलता दिलाना एक चुनौती रहेगी। समाजवादी पार्टी के पूर्व मुिखया मुलायम सिंह एनडी तिवारी का काफी सम्मान करते थे। यूपी के मुख्यमंत्री रहते हुए सीएम अिखलेश यादव ने रोहित शेखर को परिवहन विभाग का सलाहकार नियुक्त किया था। पिता के जन्मदिन से रोहित की सियासी चर्चा 2015 में हल्द्वानी में पूर्व सीएम एनडी तिवारी ने अपना 90वां जन्मदिन मनाया था। इस समारोह में यूपी के तत्कालीन सीएम अिखलेश यादव समेत प्रदेश की हर बड़ी हस्ती पहुंची थी। इस दिन से सूबे की सियासत में रोहित शेखर की चर्चाएं शुरू हुई थीं। पिता को साथ लेकर शाह से मिले थे कांग्रेस में सियासी भविष्य टटोलने के बाद लगभग निराश हो चुके रोहित शेखर पिता संग भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलने पहुंचे थे। एक खांटी कांग्रेसी की शाह से मुलाकात काफी चर्चाओं में रही। हालांकि मुलाकात का रोहित को कोई लाभ नहीं मिल सका। विधानसभा चुनाव से पूर्व दमुवाढूंगा को राजस्व ग्राम घोषित करने का मुद्दा काफी उछला जबकि इस मामले में महापंचायत बुलाई गई थी। पूर्व सीएम एनडी बेटे रोहित शेखर को लेकर यहां पहुंचे, लेकिन इनकी कार के आगे स्थानीय कांग्रेसियों ने जमकर हंगामा किया। एनडी व रोहित के खिलाफ वापस जाओ के नारे तक लगाए गए। तब रोहित ने कहा था, चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करने की वजह से कुछ लोग परेशान है। जबकि 2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान रोहित शेखर पिता व मां उज्ज्वला तिवारी के साथ नैनीताल पहुंचे थे। नैनीताल एनडी का गृह जनपद है। लिहाजा रोहित को लगा कि यहां खुद को स्थापित करना आसान होगा। भीमताल, हल्द्वानी, रामनगर व लालकुआं क्षेत्र में एनडी तिवारी के समर्थकों की संख्या ज्यादा होने के कारण रोहित ने सभी जगहों पर डेरा जमाया। पहले लगा कि उन्हें कांग्रेस से टिकट मिलेगा। एक बार तो हल्द्वानी से उनके टिकट की चर्चा ने खूब जोर पकड़ा, पर यहां भी वह चूक गए।

हम भी उत्सुक थे,मगर सब कुछ बीच में ही खत्म हो गयाः हरदा
देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यंत्री व कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने कहा कि रोहित शेखर तिवारी की असामयिक मौत बहुत हृदयविदारक है। मैं विश्वास नहीं कर पा रहा हूं। एक ऊर्जा से भरपूर, परिपक्व और विचारों से बहुत ही संघर्षशील, अध्ययनशील नौजवान जिससे बहुत उम्मीदें थी अपने पिता के नाम को आगे बढ़ाने की, वो बीच में ही हमको छोड़ करके चल दिया। अभी कुछ दिन पहले उनसे भविष्य की योजना के विषय में बातचीत हुई थी। वो कांग्रेस के साथ अपनी लीगेसी के महत्व को समझते थे और मुझसे कांग्रेस में अपनी संभावनाओं के विषय में उन्होंने चर्चा की थी। हम भी उत्सुक थे क्योंकि नारायण दत्त तिवारी जी को कोई कुछ कहे मगर वो कांग्रेस के इतिहास का हिस्सा रहे। तो उनके पुत्र को हम यकीनन कांग्रेस के साथ जोड़ करके आगे देखना चाहते थे मगर सब कुछ बीच में ही खत्म हो गया, मुझे बहुत दुख है। उज्ज्वला जी के संघर्ष को मैं प्रणाम करता हूं, रोहित शेखर के संघर्ष को मैं प्रणाम करता हूं। भगवान मृत आत्मा को शांति दे और उज्ज्वला जी को इस बहुत बड़े सदमे को सहन करने की शक्ति दे।

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