‘सीएम धामी व राज्यपाल’ की भेंट से बढ़ी “विधायकों की धड़कनें”: मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं हुई तेज

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महामहिम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात को बताया शिष्टाचार भेंट
देहरादून। वैसे तो राज्य के मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल की भेंट एक सामान्य सी बात है ,लेकिन यदि महामहिम भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करके दिल्ली से वापस लौटे हों और राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार प्रतीक्षित हो तो राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री की भेंट विशिष्ट हो जाती है तथा राजनीतिक गलियारे में ऐसी मुलाकात के कुछ खास अर्थ निकले जाने लगते हैं । लिहाजा जैसे ही उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रि) गुरमीत सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हुई मुलाकात की जानकारी दी ,वैसे ही सियासी हलके में धामी कैबिनेट के विस्तार की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया और चर्चाओं के जोर पकड़ते ही मंत्री पद के दावेदार विधायकों की धड़कने अचानक बढ़ गई। हालांकि महामहिम राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात को सौजन्य एवं समसामयिक मुद्दों पर विचार विमर्श वाली भेंट बताया है, लेकिन इस मुलाकात के बाद राजनीति के जानकार उत्तराखंड में कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होने के कयास लगा रहे हैं । चर्चाओं के ताजा दौर में ये भी कहा जा रहा है कि सीएम धामी के दिल्ली से लौटने के बाद राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रि) गुरमीत सिंह भी दिल्ली गए। जिस तरह से लगातार बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से उनकी मुलाकात हुई, उसके बाद प्रदेश में निश्चित तौर पर कुछ राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती हैं।राज्यपाल से मुख्यमंत्री की मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं इसलिए भी तेज है, क्योंकि बीते दिनों ही बीजेपी ने अपने 20 सक्रिय कार्यकर्ताओं को सरकार में बड़े दायित्व सौंपे हैं। दायित्व बंटवारे का यह इंतजार पिछले कई महीनों से हो रहा था, लेकिन अब जिस तरह से धीरे-धीरे सरकार का पिटारा खुल रहा है, इसने बीजेपी के तमाम नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं।मार्च महीना खत्म होने के बाद अब अप्रैल लग चुका है, लेकिन अब तक उत्तराखंड में कैबिनेट विस्तार नहीं हुआ है और न ही बीजेपी को अपना नया प्रदेश अध्यक्ष मिला है। इसलिए कहा जा रहा कि अंदर खाने सारा होमवर्क हो चुका है और अब किसी भी समय उत्तराखंड में मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। चर्चा तो यह भी जोरों पर है कि कैबिनेट विस्तार से पहले बीजेपी को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में एक नया चेहरा मिल सकता है । इसके अलावा यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि धामी सरकार 20 दायित्वधारियों की घोषणा के बाद अब एक बार फिर से 18 और नए दायित्वधारियों की घोषणा कर सकती है। बता दें कि पिछले दो महीने से कई बार मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं कई बार जोर पकड़ चुकी हैं। पिछले महीने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्टð ने दिल्ली के कई चक्कर लगाए । जब-जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और महेंद्र भट्टð देहरादून लौटे तब-तब धामी कैबिनेट के विस्तार की चर्चाओं को हवा मिलती रही और भाजपा विधायकों की धड़कनें बढ़ती रही। हाल ही में प्रेमचंद अग्रवाल की इस्तीफे के बाद सरकार के दो बड़े विभाग वित्त और संसदीय कार्य मंत्री के पद खाली हुए हैं। ऐसे में फिलहाल यह दोनों विभाग मुख्यमंत्री के पास हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के पास पहले से ही 40 विभाग हैं। जिसके चलते जानकारों का यह तर्क है कि अब मुख्यमंत्री को अपने कंधों से बोझ जल्द ही हल्का करना पड़ेगा।

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